महिला सुरक्षा

हर एक महिला की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी होनी चाहिए
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भाजपा सरकार में बढता बलात्कार

उत्तर प्रदेश में बलात्कार की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। एक के बाद एक सामने आती बलात्कार की घटनाएं यह साबित करती हैं कि हमारा प्रदेश महिलाओं के लिए बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है।वह सरकार जो सत्ता में आते ही महिलाओं की सुरक्षा के लिए प्रयासरत नजर आ रही थी उसी के आदमी बलात्कारी निकल रहे हैं। जब सत्ता पर काबिज लोग ही अपराध करने लगे तो समझ लेना चाहिए कि प्रदेश के बुरे दिन आ गए हैं। सबसे बडा ताज्जुब तो तब होता है जब सरकार के पदों पर पदासीन लोग सब कुछ जानते हुए भी अपराधी को बचाने की कोशिश में लगे हुए हैं।

उत्तर प्रदेश में इस समय भाजपा की सरकार है और भाजपा का ही एमएलए इस समय उन्नाव घटना में मुख्य बलात्कारी है। लगभग सब कुछ खबर होने के बावजूद भी पुलिस और सरकार इस बलात्कारी एमएलए को बचाने की भरपूर कोशिश में लगी हुई थी , कितने शर्म की बात है। सरकार ऐसा सिर्फ इसलिए कर रही है ताकि उसकी पार्टी की छवि न खराब हो और वोट बैंक सलामत रहे लेकिन सिर्फ कुछ वोटों के लिए किसी बलात्कारी को पनाह देना या जनता के साथ विश्वासघात करना किसी तरह से उचित नहीं है।

अगर बलात्कारी सिर्फ इसलिए बच जाता है कि वह एक भाजपा का विधायक है या उसे मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री का समर्थन हासिल है तो यह हमारी न्यायपालिका पर सवाल खडा कर सकता है। बलात्कारी सिर्फ एक अपराधी होता है चाहे वह कोई भी हो । जब एक खास इंसान कोई घिनौना काम कर देता है तो उसकी खासियत वहीं पर खत्म हो जानी चाहिए और उसके साथ सिर्फ उसी तरह का सुलूक किया जाना चाहिए जैसा कि एक आम अपराधी के साथ होता है।

पापा ! बेटी हूँ इसलिए मार न देना

दकियानूसी खयालात में

आकर दुनिया की बात में

कोख में ही खंजर तुम उतार ना देना

पापा बेटी हूँ मैं इसलिए मुझे मार ना देना

आने दो बस दुनिया में पापा बोझ न बनूंगी मैं

रूखा सूखा जो भी दोगे खुशी से खा लूंगी मैं

सोचकर मेरे बारे में कुछ टेंशन मत लेना तुम

एक ही खिलौना हो तो भैया को दे देना तुम

मुझको कुछ देना ना देना तुमको सब आजादी है

प्यार से बेटी कहना मेरे लिए इतना ही काफी है

मैं नहीं कहती कि मुझको बेटे जैसा प्यार करो

मुझको जिन्दा रहने दो इतना ही उपकार करो

जनम दिया है बेटी को ये सोच के देखो हे पापा

मम्मी को अपनी नजरों से उतार ना देना

पापा बेटी हूँ मैं इसलिए मुझे मार ना देना


दकियानूसी खयालात में

आकर दुनिया की बात में

कोख में ही खंजर तुम उतार ना देना


पापा बेटी हूँ मैं इसलिए मुझे मार ना देना

भ्रूणहत्या किस श्रेणी की कायरता है

तरह तरह के कायर देखे

पूछने का अब दिल करता है

गर्भ में इक बेटी को मारना

किस श्रेणी की कायरता है

ऐ समाज मुझको तू आज

इक बात जरा खुल के समझा

तेरा ये इंसाँ मार के बेटी

बेटों पर ही क्यों मरता है

या मेरे रब तू जाने सब

फिर क्यों जुल्म ये होता है

क्या तेरा इंसान आजकल

तुझसे भी नहीं डरता है

इस धरती पर सर्वश्रेष्ठ

हम खुद को मानव कहते हैं

अपनी बच्ची की ही हत्या

अरे यह कैसी मानवता है

कूडेदान में देखता हूँ जब

नवजात बच्चियों की लाशें

आग लगा दूँ दुनिया भर को

कुछ ऐसा मन करता है


तरह तरह के कायर देखे

पूछने का अब दिल करता है

गर्भ में इक बेटी को मारना


किस श्रेणी की कायरता है

कब तक बेटियां त्याग करेंगी ?

एक बेटी जब से जन्म लेती है तभी से उसका त्याग शुरू हो जाता है। यह हमारी पुरानी सोच का असर है कि अक्सर माँ बाप बेटियों को उतनी तवज्जो नहीं देते हैं जितना कि बेटों को, लेकिन त्याग की मूर्तियां ये बेटियां कभी अपने परिवार से या माँ बाप से इस बात की शिकायत नहीं करती हैं। बात चाहे शिक्षा की हो , आजादी की हो या अन्य सुख सुविधाओं की हो बेटों की तुलना में हमेशा बेटियों को ही समझौता करना पडता है। यहां तक कि यह भी सच है कि माँ बाप के द्वारा कमाई गई सम्पत्ति में बेटियों का भी उतना ही हक होता है जितना कि बेटों का, लेकिन बेटियां कभी भी इन सम्पत्तियों पर अपना हक नहीं जताती हैं। एक तरफ जहाँ दो भाई छोटी सी सम्पत्ति के लिए भी एक दूसरे की जान के दुश्मन बन जाते हैं वहीं बहनें अपना हिस्सा भी भाइयों को सौंपकर ससुराल चली जाती हैं।

हमारी बेटियों के इतना त्याग करने के बाद भी हमारा समाज बेटियों से नफरत करता है, बेटियों को बोझ समझता है, उन्हें पैदा होने से पहले ही मार देता है यह बडे ही दुख और शर्म की बात है। आखिर क्यों हमारा समाज ऐसा है ? इस सवाल का जवाब हमें वहीं ले जाता है जहां से समाज का पहली बार निर्माण शुरू हुआ था। शायद अकेले रहने वाले इंसानों ने जब समाज बनाया तभी उसने बेटियों के हक और अधिकार सीमित कर दिए थे। चूंकि यह समाज के निर्माण के शुरुआती दिनों में हुआ था तो समय बीतने के साथ साथ इसे समाज का एक मूलभूत नियम समझा जाने लगा। इसके बाद आने वाली पीढियों ने बेटियों से आजादी छीनकर और उन्हें शिक्षा से वंचित रखकर इस नियम को इतना मजबूत बना दिया कि आज तक हमें इस पक्षपातपूर्ण नियम को बदलने के लिए जद्दोजहद करनी पड रही है।

हालांकि "शिक्षा " ने समाज के इस बडे पेड की बहुत सी शाखाओं को इस नियम से आजाद कर दिया है लेकिन कुछ शाखाएं ऐसी भी हैं जहाँ पर शिक्षा अभी तक पहुंच ही नहीं पाई है और उन शाखाओं में अब भी बेटियों के बिपक्ष में बनाया गया यह नियम ही लागू है।

बेटियों ने हमेशा पुराने समाज के नियमों के चलते अपने सपनों का बलिदान दिया है लेकिन ये समाज आखिर कब तक बेटियों से ही त्याग करवाता रहेगा । क्या बेटियों के लिए समाज अपने कुछ पुराने दकियानूसी नियमों को त्याग नहीं सकता ? बेटियों ने काफी हद तक अपने आपको सम्भालने का प्रयास किया है और जागरूक हुई हैं, शिक्षित हुईं हैं लेकिन फिर भी उन्हें हम मर्दों और समाज के सपोर्ट की जरुरत है इसलिए हमें चाहिए कि हम उनको , उनके सपनों का वो आसमान मुहैया कराएं जिसमें वो आजाद होकर उडान भर सकें और लोगों की यह सोच बदल सकें कि बेटियां बोझ नहीं होती बल्कि बेटी ईश्वर का दिया हुआ वह जरूरी और कीमती तोहफा है जिनके न होने पर इस समाज, इस मानव जाति और इस दुनिया की कल्पना भी नहीं की जा सकती ।


बेटियों से ही क्रांतिकारी परिवर्तन सम्भव



उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने प्रदेशवासियों को संदेश दिया कि बेटियों को बेटों से कम न समझे और उनमें किसी तरह का भेदभाव करना उचित नहीं है क्योंकि बेटियों में भी उतनी ही क्षमता होती है जितनी कि बेटों में।



इधर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने भी बेटियों को सम्मान और हक देने की बात कही और यहां तक कहा कि एक बेटी लगभग दस बेटों के बराबर होती है।

हम देश भर की महिलाओं और बेटियों की तरफ से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री जी को उनकी इस बडी और अच्छी सोच के लिए धन्यवाद करते हैं और यह उम्मीद भी करते हैं कि कथनी और करनी में फर्क नहीं होगा और महिलाओं की सुरक्षा की उचित व्यवस्था की जाएगी।

लडकियों को भी मौके मिलने चाहिए

दुनिया दिनों दिन आगे बढती जा रही है लेकिन हमारे देश में लोग आज भी पुरानी रूढिवादी सोच से जकडे हुए हैं। जहाँ एक तरफ विकसित देशों की महिलाएं पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ रही हैं और अपने परिवार के साथ साथ देश का नाम भी रोशन कर रही हैं वहीं भारत में आज भी बेटों की चाहत में बेटियों की बलि दी जाती है। यहां पर यदि कोई लडकी पढना लिखना चाहती है, अपने सपने पूरे करना चाहती है तो परिवार के लोग ही साथ नहीं देते।समाज के लोग लडकियों का हौसला बढाने की जगह उनकी हिम्मत तोडने का काम कर रहे हैं।

काबिलियत होने के बावजूद भी देश की बेटियों को न जाने कितनी समस्याओं का सामना करना पडता है। लडकियां एक हद तक परम्परागत समाज से लड भी लेती हैं लेकिन जब उनके परिवार के लोग ही साथ छोड देते हैं तो उनकी हिम्मत टूटने लगती है। वैसे भी एक लडकी के लिए अपने सपने पूरे करने के लिए पुराने विचारों वाले अपने ही परिवार से लडना आसान नहीं होता।

पेशेवर रेसलर "कविता दलाल" का कहना है ," समाज की रूढिवादी सोच से लडना आसान नहीं होता।लडकियों के मामले में तो यह और भी मुश्किल है लेकिन एक शुरुआत करनी होती है जो मैनें और मेरे परिवार ने की।मेरी सफलता को आज सम्मान मिल रहा है जिससे यह साबित होता है कि अच्छी शुरुआत अच्छा परिणाम जरूर देती है।"

कविता भी उन लडकियों में से एक हैं जिन्हें समाज की बुरी बातों और तानों का सामना करना पडा । उन्हें भी कहा गया कि रेसलिंग उनके वश की बात नहीं है क्योंकि वो एक लडकी हैं लेकिन कविता ने हार नहीं मानी ,उन्हें परिवार का सपोर्ट मिला और उन्होंने सलवार कमीज में ही रेसलिंग करने का फैसला किया। समाज की बाधाओं को अपनी हिम्मत और हौसले से पार करते हुए कविता आज एक सफल रेसलर हैं।

भारत की हर बेटी में वो जुनून है ,वो आग है कि वो सानिया मिर्ज़ा, कविता दलाल, पी.वी.सिन्धू, दीपिका कुमारी, मिताली राज,साइना नेहवाल, अश्विनी पोनप्पा आदि लडकियों की तरह सफलता की नई इबारत लिख सकती हैं और अपने साथ अपने देश का नाम भी रोशन कर सकती हैं। बस जरूरत है तो उन पर विश्वास करने की और उन्हें पर्याप्त मौके देने की। एक बेटी में भी उतनी ही क्षमता होती है जितनी कि एक बेटे में। इसलिए हर शिक्षित इंसान का फर्ज है कि उन्हें जब भी मौका मिले वो अशिक्षित,नादान और पुरानी सोच वाले ग्रामीण इंसान को समझाने का प्रयास करें कि बेटियाँ बेटों से कम नहीं होती ताकि वो लडकी और लडके मे भेद न करें तथा लडकियों को भी लडकों की तरह पढने लिखने का मौका मिले।

घरेलू हिंसा को पहचानिए


महिला संरक्षण अधिनियम, 2005

महिला संरक्षण अधिनियम, 2005

एक अधिनियम है जिसका उद्देश्य महिलाओं को घरेलू हिंसा का शिकार से को बचाना है। यह अधिनियम भारतीय संसद के द्वारा २६ अक्टूबर २००६ को लागू हुआ।




क्या आप जानते हैं कि घरेलू हिंसा आखिर है क्या ?

हम बताते हैं आपको।

किसी भी तरह का शारीरिक कष्ट जैसे मारना, पीटना या ऐसा कोई कृत्य जिससे स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या होने का डर हो, किसी महिला से यौन दुर्व्यवहार करना अर्थात उसकी गरिमा का उल्लंघन करना, अपमानित करना , तिरस्कार, गाली देना, बुरी भाषा द्वारा सम्बोधित करना, आर्थिक रूप से शोषण करना और मानसिक रूप से परेशान करना इत्यादि घरेलू हिंसा के अन्तर्गत आता है।


इसके अलावा किसी भी प्रकार का

  • शारीरिक कष्ट (जैसे मार-पीट करना, थप्पड़ मारना, दाँत काटना, ठोकर मारना, लात मारना इत्यादि),

  • यौन शोषण (जैसे बलात्कार अथवा जबरदस्ती बनाए गए शारीरिक सम्बंध, अश्लील साहित्य या सामग्री देखने के लिए मजबूर करना, अपमानित करने के दृष्टिकोण से किया गया लैंगिक व्यवहार, और बालकों के साथ लैंगिक दुर्व्यवहार),

  • मौखिक और भावनात्मक हिंसा ( जैसे अपमानित करना, गालियाँ देना, चरित्र और आचरण पर आरोप लगाना, लड़का न होने पर प्रताड़ित करना, दहेज के नाम पर प्रताड़ित करना, नौकरी न करने या छोड़ने के लिए मजबूर करना, आपको अपने मन से विवाह न करने देना या किसी व्यक्ति विशेष से विवाह के लिए मजबूर करना, आत्महत्या की धमकी देना इत्यादि),

  • किसी महिला को उसके और उसके बच्चे को अपनी देखभाल के लिए धन और संसाधन न देना, आपको अपना रोज़गार न करने देना, या उसमें रुकावट डालना, आपकी आय, वेतन इत्यादि आपसे ले लेना, घर से बाहर निकाल देना इत्यादि), भी घरेलू हिंसा है।


नए साल में

कुछ समय बाद हम सब एक नये वर्ष में प्रवेश कर जाएंगे। हर साल जब हम किसी नये साल में प्रवेश करते हैं तो उम्मीद करते हैं कि आने वाला साल पिछले साल की तुलना में सुखदायक होगा और आगे बढने के कुछ नये अवसर भी विकसित होंगे। पुराना साल जब बीतने वाला होता है तो हम अपने आप से वादा करते हैं कि आगे के वर्ष में हम पहले से ज्यादा मेहनत करेंगे , प्रेम से रहेंगे और दोस्तों तथा परिवार के सदस्यों के मन में जो भी मनमुटाव होगा उसे दूर करेंगे, नौकरी में सफलता हासिल करेंगे , औरतों का सम्मान करेंगे वगैरह वगैरह।

इन सबमें जो सबसे बडा मुद्दा है वह है औरतों का सम्मान। इंसान कितना भी विकास के पथ पर आगे बढ रहा है लेकिन कहीं न कहीं औरतों के सम्बन्ध में जो पुरानी दकियानूसी सोच है वह मर्दों में पीढी दर पीढी स्थानांतरित हो रही है। अब देख लीजिए नये साल के सेलिब्रेशन पर खुशी का इजहार करने के लिए लडकियों से छेडखानी की जाती है। कुछ लोगों ने सोच रखा होता है कि फला लडकी को नये साल पर प्रपोज करेंगे अगर हाँ करेगी तो ठीक वरना किसी न किसी तरह से उसको हासिल करना है। यह सोच है आजकल के नौजवानों की जो प्यार के नाम पर लडकियों को गलत तरीकों से हासिल करना चाहते हैं। जब कोई लडकी किसी का प्रेम अस्वीकार करती है तो वह उस प्रेमी की नजर में नफरत की पात्र बन जाती है और उसे नुकसान पहुँचाने का प्रयास किया जाता है। कभी कोई उन पर एसिड फेंकता है तो कोई बलात्कार करता है। आज भी मर्द औरतों को अपने बराबर का दर्जा नहीं देना चाहते बल्कि वे औरतों को एक इंटरटेनमेंट की ही चीज समझते हैं । हमें मर्दों की यही सोच बदलनी है।

हमें यह समझना होगा कि औरतों को भी अपनी इच्छा रखने का हक है , उन्हें भी इनकार करने का अधिकार है। औरतों के मन को समझने की जरुरत है।

नये साल में हम बस इतनी उम्मीद करते हैं लोग औरतों को इंसान समझें और उन्हें वह इज्ज़त दें जिनकी वे हकदार हैं।

हैप्पी न्यू ईयर।

औरत से घर बनता है

"यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते , रमन्ते तत्र देवता: ।"

उपर्युक्त श्लोक की लाइन का अर्थ है कि जिस स्थान पर स्त्रियों की पूजा होती है अर्थात सम्मान होता है उस स्थान पर स्वयं देवताओं का निवास होता है।

यह कलयुग है इसलिए शायद देवता किसी स्थान पर प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखे जाते लेकिन इतना जरूर अन्दाजा लगाया जा सकता है कि जिस स्थान पर सुख मिले, शान्ति मिले और खुशी तथा प्रेम का वातावरण हो वहां पर अवश्य ही देवता निवास करते होंगे। इस प्रकार से कलयुग में भी उपर्युक्त श्लोक की लाइन बहुत ही सटीक बैठती है। आपने देखा होगा कि जिस घर में औरतें खुश नहीं रहतीं है या जिस घर में औरतों को गालियां दी जाती हैं या भेदभाव किया जाता है उस घर के लोग शान्ति महसूस नहीं कर पाते, सुख की रोटियां नहीं खा पाते। कुल मिलाकर पूरे घर में कलह और द्वेष ही फैला होता है। परिवार का हर सदस्य अपने बारे में ही सोचते है हमेशा एक दूसरे को नीचा दिखाने और बुराई करने में ही लगे होते हैं।

वहीं दूसरी तरफ यदि किसी घर में महिलाओं का सम्मान होता है , हर मसले में उनकी राय ली जाती है और वे खुश रहती हैं तो उस घर में खुशियाँ ही निवास करती हैं। परिवार का हर सदस्य एक दूसरे के बारे में अच्छी और सकारात्मक सोच रखता है।इससे घर में एकता बनी रहती है ।यदि परिवार का एक सदस्य नाराज है तो हर सदस्य उस एक को मनाने में लग जाता है। यही असली खुशी होती है।

याद रखिए, मर्दों से कभी घर नहीं बनता ।घर को सिर्फ औरतें ही घर बनाती हैं। वो जितनी खुश रहेंगी घर भी उतना ही खूबसूरत होगा और यदि घर खूबसूरत होगा तो अवश्य ही देवता उसमें निवास करना चाहेंगे।

इसलिए औरतों का सम्मान कीजिए, उन्हें गालियां मत दीजिए ,गन्दी भाषा का प्रयोग मत कीजिए। औरत को सम्मान के गहनों से सजाइये

और अपने घर को वास्तव में घर बनाइए।

मुस्लिम महिलाओं का सम्मान

मुस्लिम महिलाओं के हक और सम्मान की सुरक्षा को देखते हुए कैबिनेट ने विधेयक "मुस्लिम वूमेन प्रोटेक्शन आफ राइट्स आन मैरिज " को हरी झंडी दे दी है। इस विधेयक का उद्देश्य उन मुस्लिम मर्दों को सबक सिखाना है जो छोटी छोटी बात पर अपनी पत्नी तलाक देने की धमकी देते हैं या तलाक दे देते हैं। इस कानून की रूपरेखा तैयार करने के लिए गृहमंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में मंत्रिमंडलीय कमेटी का गठन किया गया था।

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बयान दिया है कि ," प्रस्तावित कानून मुस्लिम समाज की महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के लिए है। कई राज्यों ने इस विधेयक का समर्थन किया है उम्मीद है कि यह इसी सत्र में पारित भी हो जाएगा।"

तीन तलाक अर्थात तलाक-ए-बिद्दत को कोर्ट ने पहले ही असंवैधानिक करार दिया है।यह उपरोक्त विधेयक पर आधारित कानून सिर्फ तीन तलाक के मामलों में ही क्रियाशील होगा तथा जम्मू एवं कश्मीर को छोडकर देश के हर राज्य में लागू होगा।

इस कानून का उल्लंघन करने वाले मर्दों को तीन साल तक की कैद और साथ ही साथ जुर्माने का भी प्रावधान है। इसके अलावा तलाक-ए-बिद्दत से पीडित महिलाओं को गुजारा भत्ता और नाबालिग बच्चों की कस्टडी लेने का अधिकार होगा।यह कानून बन जाने के बाद तीन तलाक का अपराध एक संगीन और गैर जमानती अपराध की श्रेणी में रखा जाएगा।

वास्तव में यह कानून उन मर्दों के मुँह पर तमाचा होगा जो अपनी पत्नी को खिलौना समझते हैं और तीन तलाक की आड में पुरानी पत्नी से छुटकारा पाकर नई शादी कर लेते हैं। इस कानून की एक और खास बात होगी कि तीन तलाक चाहे लिखित में , मौखिक में या किसी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम जैसे इंटरनेट, सोशल मीडिया से बोला गया हो सब एकसमान संगीन अपराध माने जाएंगे।

अन्य राजनीतिक दल भले ही इस कानून का किसी न किसी रूप में विरोध करें लेकिन सच यह हैं कि मुस्लिम महिलाओं को इस तरह के कानून की बहुत जरूरत है ।


सावधानी जरूरी है

मामला है लखनऊ के सरोजिनी नगर में, 9 दिसंबर शनिवार की रात का , लगभग साढे आठ बजे एक लडकी कुछ सामान खरीदने के लिए बाहर गई हुई थी। वह सामान खरीदकर लौट ही रही थी कि उसके जान पहचान के एक युवक ने उसे घर तक छोडने की बात की। चूंकि युवक युवती की जान पहचान का था इसलिए युवती ने उस पर विश्वास कर लिया और उसके साथ चल दी। शायद युवती को अन्दाजा भी नहीं था कि उसने थोडी सी जान पहचान के आधार पर उस पर विश्वास करके बहुत बडी गलती कर दी है। युवक उसको घर ले जाने के बजाय एक सुनसान जगह पर ले गया और अपने दोस्त को भी बुला लिया। दोनों दोस्तों ने मिलकर उस युवती की इज्ज़त लूट ली और बाद में सडक किनारे फेंककर भाग निकले। युवती काफी देर तक मदद के लिए किसी के आने का इन्तजार करती रही। काफी देर के बाद एक इंसान पहुंचा और जब युवती ने उससे मदद मांगी तो उस इंसान ने मदद करने के बजाय फिर से उसके साथ रेप किया। खैर, बाद में पहुंचे कुछ और लोगों ने किसी तरह युवती को घर तक पहुँचाया और पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज करवाई।

अब इसके आगे पुलिस क्या करती है क्या नहीं ये बाद की बात है लेकिन यह कोई नई घटना नही है। ऐसा पहले भी कई घटनाओं में हो चुका है जब किसी जान पहचान वाले ने ही दुष्कर्म किया है। आखिर हम और हमारे देश की युवतियां इन घटनाओं से कब सबक सीखेंगे और कब सावधानी बरतेंगे ?

घटना हो जाने के बाद हम सारा दोष सरकार , पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था को देते हैं क्या हमारा फर्ज नहीं बनता कि हम भी थोडी सावधानी बरतें, अपनी सुरक्षा को लेकर सजग रहें, अपनी आँख और कान खुला रखें ?

हम बार बार देश की युवतियों से यही अपील करते हैं कि अपने घर के सदस्यों के अलावा किसी पर भी पूरी तरह विश्वास न करें खासकर रात के समय और यदि मजबूरी में किसी कम जान पहचान वाले के साथ जाना पडे तो कम से कम अपने घर वालों को इन्फार्म कर दें और सख्स का नाम बता दें जिसके साथ आप हैं तथा साथ ही साथ उस सख्स की हर हरकत पर ध्यान दें , यदि उसकी नीयत पर जरा सा भी संदेह हो तो तुरन्त उस सख्स को पता चले बिना पुलिस या महिला हेल्पलाइन पर इन्फार्म करें।

(महिला सुरक्षा से सम्बंधित हर हेल्पलाइन नंबर आप हमारी वेबसाइट से नोट कर सकते हैं। )


हम हर परिवार को यह सलाह देना चाहते हैं कि अपने घर की लडकियों को मजबूत बनाएं, उन्हें सावधान करें कि वो किसी पर भी आँख बन्द करके विश्वास न करें भले ही वह आपका विश्वसनीय पडोसी या रिश्तेदार हो। इस वक्त माहौल इतना खराब है कि जिसको मदद के लिए पुकारो वही फायदा उठा लेना चाहता है।

इसलिए आप सबसे गुजारिश है कि खुद को और अपनों को इतना सावधान रखिए कि घटनाएं कम से कम हों।

याद रखिये, वो घटनाएं जो थोडी सी सावधानी से टाली जा सकती थीं जब घटित होती हैं तो बडी तकलीफ होती है ।

सावधान रहिए, सुरक्षित रहिए।

बलात्कारियों को फाँसी दो

दुनिया में शायद ही कोई ऐसा परिवार होगा जिस परिवार में बेटियां नही हो और हर परिवार अपने घर की बेटी की सुरक्षा को लेकर गम्भीर रहता है। हर बेटी का बाप चाहता है कि उसकी हमेशा सुरक्षित रहे,और हर बहन का भाई चाहता है कि उसकी बहन सडकों पर ,कालेज में सुरक्षित महसूस करे। पर यह होगा कैसे ? क्या सिर्फ सरकार के सुरक्षा इन्तजाम काफी हैं इसके लिए ? जी नहीं, दरअसल जब तक हर मर्द के मन में लडकियों के लिए सम्मान की भावना विकसित नहीं होगी कोई भी नियम और सरकारी कानून हमारी बहन , बेटियों को सुरक्षित नही कर सकता।
महिलाओं में इस बलात्कार रूपी राक्षस का डर इस कदर भर गया है कि कोई भी महिला अकेले कहीं आने जाने से पहले चार बार सोचती है।हमारे देश की बेटी आज सडकों पर उतर कर न्याय मांग रही है, हमारे देश की बहनें आज पोस्टर लेकर महिलाओं साथ हो रहे बलात्कार के विरोध में प्रदर्शन कर रही हैं। यह सारी चीजें दर्शाती हैं कि हमारे देश हमारी दुनिया में महिलाएं कितनी असुरक्षित हैं।
सडकों , बाजारों की बात ही छोड दीजिए लडकियाँ कहीं पर भी सुरक्षित नही हैं।आज समाज इतना अधिक दूषित हो चुका है कि सगे रिश्ते भी कलंकित होते जा रहे हैं। समाचार पत्रों में अक्सर पढने को मिलता है कि शराबी बाप ने बेटी की इज्ज़त तार तार की या चचेरे भाई ने ही बहन का यौन शोषण किया । बदलते समय के साथ लोगों की सोच गन्दी होती जा रही है। हम अक्सर बाजारों में देखते हैं कि अधेड मर्द जिसकी खुद की भी जवान बेटी होती है ,जब किसी दूसरे घर की लडकियों को देखता है तो कहता है वाह क्या मस्त आइटम है।यह सब किसकी देन है ? मोबाइल, इंटरनेट या जिसकी भी देन हो लेकिन आने वाले समय में हालात और भी बदतर होने वाले हैं। अगर ऐसा ही चलता रहा तो एक दिन सडकों पर सिर्फ मर्द ही नजर आएंगे।
अभी भी वक्त है हालात सुधारे जा सकते हैं । हमारी लोगों से अपील है कि यदि आप सब कहीं पर भी किसी लडकी के साथ हो रही बदतमीजी या छेडखानी को देखें तो कृपया नजरअंदाज न करें। यह ना सोचें कि यह लडकी हमारे घर की नहीं है तो हम क्यों मदद करें। याद रखिए आज यदि किसी और की बेटी है तो कल उसी जगह पर आपकी बेटी या बहन भी हो सकती है।
फिर भी यदि आप अपने आपको कमजोर समझते हैं , लडकियों पर होते अत्याचार को देखते हुए भी आप में कुछ करने की हिम्मत नहीं है तो कम से कम पुलिस को इन्फार्म जरूर कर दें। अगर इतना भी आपसे ना हो पाए तो कृपया कम से कम बलात्कार के विरोध में प्रदर्शन करती लडकियों का साथ जरूर दे ,उनके साथ जरूर खडे हों। आपको देखकर उनका हौसला तो बढेगा।
अब सिर्फ एक ही नारा होना चाहिए..
ना इज्ज़त ना शाबाशी दो
बलात्कारियों को फाँसी दो।

औरत की एहमियत

कभी कभी हम देखते हैं कि पति पत्नी में सिर्फ खुद के वजूद या एहमियत को लेकर अनबन हो जाती है । पति समझता है कि घर का मालिक वही है हमेशा उसी की मर्जी चलनी चाहिए या पत्नी समझती है सारा घर वही सम्भालती है इसलिए हर फैसला उसकी रजामंदी से ही होना चाहिए। जिस घर में पति और पत्नी दोनों नहीं झुकना चाहते उस घर में पति पत्नी का रिश्ता कमजोर होने लगता है, कभी कभी तो टूट भी जाता है।
ऐसे में पति और पत्नी दोनों को यह समझना होगा कि वे दोनों एक दूसरे के पूरक हैं, एक ही साईकिल के दो पहिए ह़ै, दोनों में से यदि एक भी किसी फैसले के खिलाफ है तो वह फैसला सुकून नही दे सकता बल्कि समस्या ही खडी करेगा। इसमें कोई शक नहीं कि मर्द थोडे कठोर होते हैं और औरतें कोमल , इसीलिए ज्यादातर नियम मर्दों के बनाए हुए हैं और उन्हीं के पक्ष में हैं लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल भी नहीं है औरतों की कोई एहमियत नहीं है। यदि पत्नी अपने पति के फैसलों में उसका साथ दे रही है तो पति को भी चाहिए कि वह अपने फैसलों में पत्नी की रजामंदी शामिल करे।
पति वह नहीं है जो बल का प्रयोग करके पत्नी का प्रेम हासिल करता है। यूँ तो भारतीय पत्नियों की विशेषता है कि वे अपने पति से प्रेम ही करती हैं चाहे पति अच्छा हो या उन्हें मारता पीटता हो लेकिन लायक पति कहलाने का हकदार तो सिर्फ वही है जो प्रेम से अपनी पत्नी का प्रेम हासिल करता है। सच्चे पति पत्नी के रिश्ते में कोई छोटा या बडा नहीं होता है बल्कि दोनों बराबर होते हैं।
औरतें सम्मान की हकदार हैं और लायक भी , शायद इसीलिए भगवान के नाम से पहले उनकी पत्नियों/प्रेमिका का नाम लिया जाता है जैसे , गौरीशंकर, सीताराम या राधेकृष्ण। इन नामों को देखकर यह मत सोचिए कि गौरी, सीता और राधा क्रमशः शंकर, राम और कृष्ण से श्रेष्ठ हैं इसलिए इनका नाम पहले आता है , बल्कि इसलिए पहले आता है क्योंकि भगवान भी औरतों का सम्मान करते हैं। अपने बारे में सोचने से पहले पत्नी के बारे मे सोचना, अपना हक जताने से पहले उनके हक के बारे में सोचना ही उनका सम्मान करना है।

बेटी ही घर की लक्ष्मी है

हर तरफ दीपावली की खुशियाँ हैं और हर कोई अपने अपने घर की साफ सफाई में लगा हुआ है क्योंकि हिन्दू समाज में यह मान्यता है कि दीपावली के दौरान जब हर तरफ रोशनी ही रोशनी दिखाई देती है उस दिन माता लक्ष्मी दुनिया के भ्रमण पर निकलती हैं और यह देखती हैं कि कौन सा घर सबसे ज्यादा सुन्दर और साफ सुथरा है। ऐसा माना जाता है कि जो घर माता लक्ष्मी को पसंद आ जाता है वे उसी घर में बस जाती हैं और उस घर में कभी अन्न धन की कमी नही होती है।
लालच में पडकर लोग माँ लक्ष्मी की प्रतीक्षा करते हैं जबकि सच तो यह है लक्ष्मी तो पहले से ही हर घर में मौजूद रहती हैं कभी बेटी के रूप में तो कभी माँ, बहन और बीवी के रूप में। आज लालची इंसान अपने स्वार्थ में इस तरह खो चुका है कि वह माता लक्ष्मी को सिर्फ धन दौलत के रूप में ही पहचानता है। सिर्फ धन दौलत के रूप में माता लक्ष्मी को सीमित करना हम इंसानों की छोटी सोच को दर्शाता है।
अगर हम वास्तव में चाहते हैं कि माता लक्ष्मी हमारे घरों में निवास करें तो सबसे पहले उनके अन्य रूपों को पहचानना होगा। महिलाओं की इज्ज़त करनी होगी चाहे वह अपने घर की हों या किसी और के घर की। हर नारी में लक्ष्मी होती हैं और हर नारी में शक्ति। जो इंसान नारी की इज्ज़त नही करता वह दीपावली में चाहे कितना भी अपने घर को साफ और सुन्दर बना लें चाहे कितनी भी पूजा अर्चना कर ले , माता लक्ष्मी उसके घर में कभी भी प्रवेश नहीं करेंगी और यदि कर भी लिया तो वहां रुकेंगी नहीं, तुरन्त चली जाएंगी।
याद रखिए एक माँ ही परिवार में रिश्तों की नींव का निर्माण करती है, एक बहन ही हमारे झूठ में भी हमारा साथ देती है, एक बीवी ही जीवन को खूबसरती से भरती है और एक बेटी ही अपने साथ खुशियों की सौगात लाती है।क्या विभिन्न रूपों में हमारे जीवन में शामिल ये सब औरतें किसी लक्ष्मी से कम हैं ? जिसकी जिन्दगी में ये सब हैं वह तो पहले से ही धनवान है और जिसकी जिन्दगी में ये सब नहीं हैं वह तो धनवान होते हुए भी दरअसल बहुत गरीब है।
तो इस दीपावली आपसे गुजारिश है कि बेशक माता लक्ष्मी की पूजा कीजिए पर साथ ही साथ घर की लक्ष्मी औरतों का भी सम्मान कीजिए, उनकी इज्ज़त कीजिए ।
दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।

लडकियों पर एसिड फेंकना मर्दानगी नही

लडकियों के चेहरों पर तेजाब फेंककर उनको बदसूरत बनाना आजकल आम हो गया है। आए दिन लडकियों पर एसिड अटैक की घटनाएं सामने आती रहती हैं। ये वे लोग होते हैं जो प्यार में असफल हो चुके होते हैं और मानसिक रूप से बीमार होते हैं।
ऐसे मानसिक रोगियों से लडकियों को सावधान रहने की जरुरत है। यदि कोई लडकी किसी लडके के प्यार के प्रस्ताव को ठुकराने जा रही है तो लडकी को इस बात का रखना जरूरी होता है कि उसकी "न" सुनने के बाद लडके का क्या रिएक्शन होता है । यदि लडकी द्वारा ठुकराए जाने के बाद लडका गुस्सा दिखाता है या चिडचिडापन महसूस करता है तो लडकी को समझ लेना चाहिए कि लडके की प्रकृति अच्छी नहीं है।
ऐसे लडको की हर हरकत को ध्यान में रखा जाना चाहिए और ज्यादा से ज्यादा दूरी बना कर रखनी चाहिए।फिर भी यदि आपको उस लडके से थोडी सी भी असुरक्षा महसूस हो तो तुरन्त इसकी जानकारी अपने परिवार को या पुलिस को दें ।
लडकियों के चेहरों पर तेजाब फेंकना लडकों में एक तरह की मानसिक विकृति का परिणाम है। जिन लडकों में इस तरह की मानसिक विकृति होती है उनको लगता है कि जो लडकी उन्हें पसंद आ गई वह सिर्फ उनकी है । ऐसे में जब वह लडकी उनके प्यार को अपनाने से इनकार कर देती है तो वे अपने आपको बहुत ज्यादा अपमानित समझने लगते हैं और सोचते हैं कि लोग उनकी मर्दानगी का मजाक उडाएंगे । जबकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं होता है क्योंकि जरूरी नहीं कि हम जिस लडकी को पसन्द करें वो भी हमें पसन्द ही करे। प्यार में अपमानित होने जैसी कोई बात नहीं होती है यदि कोई लडकी किसी लडके के प्रेम प्रस्ताव को ठुकराती है तो लडके को उसके फैसले का सम्मान करना चाहिए न कि उससे बदला लेने के लिए उस पर एसिड फेंकना चाहिए या अन्य तरह का कोई नुकसान पहुँचाना चाहिए, दरअसल यही तो सच्चा प्यार होता है।
आजकल उन नवयुवकों को समझाने की जरुरत है जो इस तरह का घिनौना अपराध करके किसी मासूम लडकी की जिन्दगी को नरक बनाते हैं। इसके लिए परिवार के लोगों को अपने बच्चों को सही संस्कार देने चाहिए और उन्हें सही गलत में अन्तर करना सिखाया जाना चाहिए।
कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो आपसी रंजिश की वजह से अपने विरोधियों के घर की महिलाओं पर एसिड फेंकते हैं यह बिलकुल ही कायराना हरकतें हैं। ऐसा करके भले ही थोडी देर के लिए उस इंसान को अपने दुश्मन पर फतेह हासिल करने की खुशी मिल जाए मगर जिस मासूम की जिन्दगी बर्बाद हो गई है उसके लिए क्या ईश्वर उसे माफ करेगा, बिल्कुल नहीं।
सबसे बडा सवाल यह है कि जब लडके लडकियों के साथ वेवफाई करते हैं या उनको धोखा देते हैं तो लडकियां तो चुपचाप सह लेती हैं लेकिन औरतों महिलाओं की छोटी सी गलती पर हम बिना सच्चाई की गहराई तक गए उनसे कितनी सख्ती से पेश आते हैं, एसिड फेंकते हैं , यहां तक कि जान लेने की भी कोशिश करते हैं , क्यों ? क्या सिर्फ इसलिए कि हम मर्द हैं ? आखिर यह कैसी मर्दानगी है ?

छात्राओं से छेडखानी पर जलता बीएचयू

बीएचयू, वाराणसी
उत्तर प्रदेश।

वाराणसी में छात्राओं ने आए दिन अपने साथ हो रही छेडखानी के विरोध में धरना प्रदर्शन क्या शुरू किया सरकार और पुलिस प्रशासन की नींद उड गई है। यह वह मोदी और योगी की सरकार है जो चुनाव से पहले प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बहुत जागरूक नजर आ रही थी मगर जैसे ही यह सरकार सत्ता में आई अन्य सरकारों की तरह यह भी अपने वादे भूल गई।
जिसका परिणाम यह हुआ कि छात्राओं को खुद अपने साथ हो रही छेडखानी का विरोध करने के लिए आगे आना पडा।
मामला है 21 सितंबर का जब दृश्य संकाय की एक छात्रा के साथ भारत भवन के पास छेडखानी की गई और उस छेडखानी से आक्रोशित छात्राएं विरोध करने के लिए त्रिवेणी हास्टल से सडकों पर उतर आईं । छात्राओं की मांग सिर्फ इतनी थी कि कुलपति स्वयं आकर उनको आश्वासन दें और सुनिश्चित करें की आगे से इस तरह की छेडखानी घटनाएं नहीं होगी लेकिन कुलपति ने यह आश्वासन देने आने के लिए साफ मना कर दिया ।जिससे आक्रोशित छात्राओं ने कुलपति आवास के पास भी नारे लगाना जारी रखा तो बीएचयू के सुरक्षा कर्मचारियों ने उन पर लाठीचार्ज कर दिया जिसमें कई छात्राएं बुरी तरह से घायल हो गई।
जब यह सूचना संस्थान के बाकी छात्रों को हुई तो वे सुरक्षा कर्मचारियों की इस हरकत से और भी उग्र हो गए।
अब तक बात पुलिस प्रशासन तक पहुंच चुकी थी और सिपाही गश्त पर आ चुके थे।छात्राओं पर हुए लाठीचार्ज के विरोध मे जब छात्र सामने आए तो पुलिसकर्मियों द्वारा उन पर भी लाठियां भांजी गई।
अपनी असफलता को छुपाने के लिए छात्रों पर लाठीचार्ज करवाना कहां का न्याय है। क्या कोई अपनी सुरक्षा को लेकर धरना भी नहीं दे सकता है। अधिकारियों का कहना है कि छात्रों ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और डीएम के साथ बदसलूकी की जिसके चलते उन पर लाठीचार्ज किया गया हम पूछते हैं कि आप लोग एक बार थोडी सी बदसलूकी से इतना खफा हो गए कि छात्रों और छात्राओं पर लाठीचार्ज करवा दिए , जरा उन लडकियों से भी उनका दर्द पूछिए जो हर रोज दिन भर में न जाने कितनी बार सडक छाप मजनुओं की बदसलूकी सहती हैं उन पर क्या बीतती होगी। छात्राओं ने अपने ऊपर हो रही बदसलूकी को रोकने और विश्वविद्यालय प्रशासन,सरकार तथा पुलिस प्रशासन को जगाने के लिए धरना प्रदर्शन शुरू किया तो आप लोगों ने उल्टा उन्हें ही बदतमीज घोषित कर दिया और बदसलूकी का इल्जाम लगाकर लाठीचार्ज करवा दिया। ये तो भाई हद हो गई आपने तो छात्राओं को सीधा सीधा जवाब दे दिया कि हम तुम लोगों की रक्षा नहीं कर सकते और तुम्हें धरना प्रदर्शन भी नहीं करने देंगे।
क्या योगी जी और मोदी जी बता सकते हैं कि उनका एन्टी रोमियो स्क्वाड कहाँ है ? आखिर उनका एन्टी रोमियो स्क्वाड फेल कैसे हो गया वो भी वाराणसी जैसे बडे शहर और बीएचयू जैसे प्रसिद्ध शिक्षण संस्थान में ?
जब एक बडे शहर और प्रसिद्ध शिक्षण संस्थान में भी लडकियों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं है तो गाँवों और छोटे शहरों में उनकी सुरक्षा के लिए क्या व्यवस्था होगी ?
हम यह नहीं कहते कि महिला सुरक्षा के मामलों में सरकार और पुलिस ने चूडिय़ां पहन रखी हैं लेकिन यदि छात्राओं को छेडखानी के विरोध में सडकों पर उतरना पडे तो यह सरकार की नाकामी, पुलिस प्रशासन की शिथिलता और एन्टी रोमियो स्क्वाड की असफलता सिद्ध करने के लिए काफी है।

नवरात्र: हर औरत में दुर्गा हैं

नवरात्र शुरू हो चुका है और अगले नौ दिन तक देवी माँ की पूजा आराधना बडे श्रद्धा भाव से की जाएगी। बहुत सारे नर नारी नौ दिन तक उपवास रखेंगे और देवी माँ का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।
मैं उन सब भक्तों को बताना चाहूंगा कि देवी माँ भी एक नारी हैं और उनका अंश दुनिया की हर नारी में विद्यमान है या यूं कहिए कि हर औरत देवी माँ का स्वरुप है। इस दुनिया में बहुत सारे लोग ऐसे भी हैं जो औरतों की इज्ज़त नहीं करते उनका सम्मान नहीं करते वो भी देवी माँ का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं और व्रत उपवास रखकर माँ को प्रसन्न करने की कोशिश करते हैं।
अब आप ही बताइए कि जिस इंसान ने 365 दिन में 356 दिन महिलाओं ( देवी माँ के स्वरूप) की इज्ज़त नहीं की उनका सम्मान नहीं किया वह 365-356= 9 दिन में माँ को प्रसन्न करके उनका आशीर्वाद पाना चाहता है। कितनी अजीब बात है कि इंसान एक तरफ महिलाओं की इज्ज़त से खिलवाड़ करता है , दहेज के लिए बहूओं को जिन्दा जला देता है, सडकों पर चल रही युवतियों को देखकर गन्दे शब्दों का प्रयोग करता है , उनका अपहरण करके बलात्कार करता है लेकिन नवरात्र में देवी माँ ( जो कि खुद नारी हैं) के सामने हाथ जोडकर खडा रहता है और उम्मीद करता है कि देवी माँ उसको आशीर्वाद दें।
क्या यह मुमकिन है कि जिस पुरुष ने कभी महिलाओं की इज्ज़त नही की बल्कि उल्टा उन पर अत्याचार किया है उस पर देवी माँ प्रसन्न होंगी ? कभी नही। क्योंकि देवी माँ खुद एक नारी हैं और नारियों पर अत्याचार करने वालों को वह आशीर्वाद नहीं सिर्फ़ दण्ड देती हैं।
देवी माँ के नौ रूप हैं और नौ दिन इन्हीं नौ रूपों की आराधना की जाती है । ये नौ रूप माँ के अलग अलग स्वाभाव को व्यक्त करने वाले होते हैं। यही नौ रूप और नौ तरह के स्वाभाव दुनिया भर की महिलाओं में देवी माँ के अंश के रूप में विद्यमान हैं। कहने का मतलब यह है कि कोई भी नारी हो या छोटी बच्ची हो सबमें देवी माँ का कोई न कोई रूप अवश्य होता है क्या पता किस रूप में देवी माँ आपसे क्रोधित हो जाएं या प्रसन्न हो जाएं इसलिए हर नारी की इज्ज़त करनी चाहिए ।
इसलिए अगर आप चाहते हैं देवी माँ का सच्चा आशीर्वाद आपको मिले और वह आपके सारे दुखों सारी समस्याओं का निवारण करें तो आप भी आज से प्रण करें कि आज के बाद आप किसी महिला के साथ दुर्व्यवहार नहीं करेंगे, सडकों पर चल रही किसी कन्या पर भद्दे और गन्दे शब्दों का प्रयोग नहीं करेंगे, दहेज की खातिर बहुओं को प्रताड़ित नहीं करेंगे और साथ ही अपने दोस्तों और पडोसियों को भी ऐसा करने से रोकेंगे। यदि आप एक भी महिला की इज्ज़त और सम्मान की रक्षा करने में सफल हो गए तो मेरा दावा है कि देवी माँ आपको बिना मांगे मनचाहा आशिर्वाद और वरदान प्रदान कर देंगी।

तो आइए हम इस प्रण के साथ कि हम समाज की हर स्त्री का सम्मान करेंगे और उनकी इज्ज़त करेंगे, देवी माँ की आराधना करते हैं और उनके चरणों में शीश झुकाते हैं।

प्रथम शैलपुत्री
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मंत्र:
वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्द्धकृत शेखराम।
वृषारूढा शूलधरां शैलपुत्री यशस्विनीम।।

गीत/भजन
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मुरझाया हुआ जीवन फूलों जैसा खिल जाएगा
नवरात्र में जो भी मांगोगे माँ से मिल जाएगा

जाओगे कहाँ बोलो होके मां से विमुख
आ जाओ दरबार में पा लो मां से थोडा सुख
कोई भी तकलीफ न कोई दर्द सताएगा
नवरात्र में जो भी मांगोगे मां से मिल जाएगा

न कोई गरीब है न अमीर न महान
मइया के दरबार में हर कोई है एक समान
छोटा या बडा कोई निराश न जाएगा
नवरात्र में जो भी मांगोगे मां से मिल जाएगा

जब ले डूबे उम्मीदें नाकामी की लहर
जब भी जीवन नइया फंसेगी जाके बीच भंवर
मां का आशिर्वाद ही बेडा पार लगाएगा

मुरझाया हुआ जीवन फूलों जैसा खिल जाएगा
नवरात्र में जो भी मांगोगे मां से मिल जाएगा

द्वितीय ब्रह्मचारिणी
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मंत्र:
दधना कर पद्याभ्यांश्च माला कमण्डलम्।
देवी प्रसीदमयी ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा ।।

गीत/भजन
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ये सोच के आया हूँ कि तेरे दर्शन पाऊँगा
ऐ माँ तेरे दरबार से खाली न जाऊँगा
तू जानती है सब कुछ मेरे मन की बातें माँ
ये पोटली मैं झूठ की कितना छुपाऊँगा
तू अपनी शरण मे आने दे अपने बच्चे को
चरणों मे तेरी ही सारा जीवन बिताऊँगा
सुन ले तू अर्जी अपने बेटे "राज" की मइया
जब तक ना आयेगी तब तक तुझको बुलाऊँगा ये सोच के आया हूँ कि तेरे दर्शन पाऊँगा
ऐ माँ तेरे दरबार से खाली न जाऊंगा

तृतीय चन्द्रघण्टा
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मंत्र:
पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैयुता।
प्रसादं तनुते मद्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता।।

गीत/भजन
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तेरे जैसा कौन यहाँ शक्तिशाली
करती रहना यूँ ही कृपा शेरावाली

दानी है तू मैइया हमको दान देदे
भटकें न राह से वो ज्ञान देदे
न्याय और धर्म की ही राह पे चलें
सच्चाई का ऐसा वरदान देदे
रस्ता मइया देखूँ हर बरस तेरा
बडा दुर्लभ है माँ दरस तेरा
बुराई पाप अधर्म से मुक्ति दे तू
लडें हम अन्याय से इतनी शक्ति दे तू
एक तरफ ममता लुटाती है तू माँ
क्रोध में हो तो तू ही बने काली
तेरे जैसा कौन यहाँ शक्तिशाली
करती रहना यूँ ही कृपा शेरावाली

चतुर्थ कुष्माण्डा
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मंत्र:
सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधनाहस्तपद्याभ्यां कुष्माण्डा शुभदास्तु मे।।

गीत/भजन
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वर दे हमको वर दे माँ
धन्य ये जीवन कर दे माँ
सुना है कि तू दानी है
जग अज्ञानी तू ज्ञानी है
मै खडा हूँ तेरे दर पे
मेरी भी झोली भर दे माँ
वर दे हमको वर दे मा
धन्य ये जीवन कर दे माँ

इक बार तेरा दीदार मिले
बच्चे को माँ का प्यार मिले
मैं सब कुछ हासिल कर लूँ
आशीष तु अपना अगर दे माँ
वर दे हमको वर दे माँ
धन्य ये जीवन कर दे माँ

वर दे हमको वर दे माँ
धन्य ये जीवन कर दे माँ

पंचम स्कन्दमाता
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मंत्र:
सिंहासनगता नित्यं पद्याञ्चितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी।।

गीत/भजन
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चैन मिला न जितना पूरे संसार में
इतना सुकून मिला माँ के दरबार में

ढूँढ के भी जिसको ढूँढ न पाया मैं
मन की वो शान्ति है माँ के दीदार में

इतनी मोहक सूरत है मइया की
देख के मन नहीं भरता एक बार में

ममता लुटाना यूँ ही बच्चों पे माँ
कमी होने पाये न तेरे लाड प्यार में

चैन मिला न जितना पूरे संसार में
इतना सुकून मिला माँ के दरबार में

षष्ठं कात्यायनी
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मंत्र:
चन्द्रहासोज्जवलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभम् दद्यादेवी दानव घातिनी।।

गीत/भजन
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मइया मेरे ऊपर भी इक उपकार कर देना
जब कभी भँवर में अटकूँ तो तू पार कर देना

रक्षक है तू दुनिया भर की जानता हूँ मैं
अपनी कृपा तू मुझपे भी इक बार कर देना

देना हमें आशीष कि आगे बढें हम भी
सुख शान्ति के सपनों को साकार कर देना

जब हारने लगे सच्चाई झूठ से कभी
तू आना धरती पर औऱ चमत्कार कर देना

मइया 'राज' के ऊपर भी उपकार कर देना
जब कभी भँवर में अटकूँ तो तू पार कर देना

सप्तम् कालरात्रि
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मंत्र:
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।।
वामपादोल्लसल्लोहलता कण्टक भूषणा।
वर्धन्मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी।।

गीत/भजन
~~~~~~

तेरे चरणों में थोड़ी जगह मिल गयी
जिन्दगी जीने की माँ वजह मिल गयी
बेवजह मैं जिये जा रहा था
व्यर्थ जीवन किए जा रहा था
तेरी भक्ति मिली
मन को शक्ति मिली
डूबी नइया को जैसे सतह मिल गयी

मुझको तेरा इशारा मिला है
आँधियों में सहारा मिला है
मेरे हर एक ग़म
हो रहे हैं खतम
खोई थी जो हँसी मुझको वह मिल गयी
तेरे चरणों में थोड़ी जगह मिल गयी
जिन्दगी जीने की माँ वजह मिल गयी

अष्टम् महागौरी
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मंत्र:
श्वेतवृषे समारूढा श्वेताम्बर धरा शुचिः।
महागौरी शुभम् दद्यान्महादेव प्रमोददा।।

गीत/भजन
~~~~~~

ऐ माँ तेरा आशीष किसी वरदान से कम नही
तेरी हर एक बात किसी बडे ज्ञान से कम नही

तू यूँ ही अपनी कृपा बरसाती रहना
हम भटकें भी तो राह दिखाती रहना
थोडी सी जगह चरणों में दो जहान से कम नहीं
ऐ मां तेरा आशीष किसी वरदान से कम नही

जीवन की हर ठोकर से बचाती रहना
धर्म न्याय का पाठ हमें पढाती रहना
चरणों में तेरे गिरना किसी उत्थान से कम नही
ऐ मां तेरा आशीष किसी वरदान से कम नही

ऐ माँ तेरा आशीष किसी वरदान से कम नही
तेरी हर एक बात किसी बडे ज्ञान से कम नही

नवम् सिद्धिदात्री
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मंत्र:
सिद्धगन्धर्वपश्चादौर सुरैरमरे रवि।
सेव्यामाना सदाभूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी।।

गीत/भजन
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तेरे कदम जिस घर मे पडे वो
घर घर नही स्वर्ग हो जायेगा
तू गर सहारा दे दे किसी को
उसका कोई क्या कर पायेगा

तेरी हँसी खुशियों का खजाना
तू खुश है तो खुश है ये जमाना
गुस्सा तेरा है कोई बवंडर
जिसमें हर इक दुष्ट खो जायेगा

आशीष तेरा मिलता रहे बस
ये सिलसिला यूँ ही चलता रहे बस
तू रूठना मत हमसे नही तो
जगता नसीबा भी सो जायेगा

तेरे कदम जिस घर मे पडे वो
घर घर नहीं स्वर्ग हो जायेगा
तू गर सहारा दे दे किसी को
उसका कोई क्या कर पायेगा।

*जोर से बोलो जय माता की*
*मिलकर बोलो जय माता की*

इण्टरमीडिएट की छात्रा का रेप

फिर से लुटी एक मासूम की इज्ज़त:

जयपुर, राजस्थान।
मामला राजस्थान के जयपुर के एक प्राइवेट स्कूल का है जहाँ इण्टरमीडिएट की एक छात्रा का दो लोगों ने दो महीने तक बलात्कार किया। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और पूछताछ की जा रही है।
स्कूल के अध्यापक जगत गुज्जर और निदेशक जगदीश यादव छात्रा को एक्स्ट्रा क्लासेस के लिए बुलाते थे और दोनों ही उसे बहला फुसलाकर उसका यौन शोषण करते थे। दोनों अपराधियों की धमकियों और बदनामी के डर की वजह से छात्रा अपने साथ हो रही इस घिनौनी हरकत के बारे में किसी से कुछ नही कहा। मामला तब सामने आया जब छात्रा गर्भवती हो गई और उसका गलत तरीके से गर्भपात करवाया गया। छात्रा का दो बार आपरेशन करवाया गया जिसमें आक्सीजन की कमी हो गई और स्थायी रूप से उसका दिमाग क्षतिग्रस्त हो गया।
हालांकि पता चलने पर छात्रा के माता पिता ने लगभग चार सौ छात्रों के साथ विद्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन किया जिसकी धजह से विद्यालय को अनिश्चित काल के लिए बन्द कर दिया गया है।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया गया है पूछताछ जारी है और आगे उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाही की जाएगी।
इस घटना के सामने आने के बाद हर पैरेंट्स को और भी सावधानी बरतने की जरूरत है। आजकल किसी पर भी भरोसा नही किया जा सकता है। अब वो जमाना गया जब लोग शिक्षकों पर खुद से भी ज्यादा यकीन किया करते थे। आज के समय में अक्सर ऐसी घटनाएं सामने आती रहती हैं जिसमें अध्यापक ही अपने छात्रों का गुनाहगार होता है। इसलिए यदि आप भी अपनी बेटी को प्राइवेट ट्यूशन के लिए भेजते हैं तो पहले ट्यूशन देने वाले का चरित्र जरूर परख लें क्योंकि अकेली लडकियों को ट्यूशन पढाने वाले हर टीचर का चरित्र अच्छा हो यह जरुरी नहीं है।
इसलिए खुद भी सावधान रहें और दूसरों को भी सावधान रहने की सलाह जरूर दें।

SAVE THE BABY GIRLS

We are living in 21st century (an educated world) but some of us behave like uneducated person. People says that we are growing and on the way of development but in case of girls we have a negative mind specially in underdevelopment country like India.
Today, people wants to have a baby boy in place of baby girl because they think that only the boys can run their offspring and become heirs. People consider daughters as a burden even its not true . Its just a result of negative thinking of mind.
Today, an educated girl can do everything that a boy can. People just need to educate their girls and give them a good manners.
To get their next kin as a boy people are trying so many tricks and start doing crime. Yes , they are killing baby girls.
In India if you will search , can find many dead baby girls in litter pile and hospital dust bin. This is really shocking that how parents can throw away their baby just because she is a girl ? Unfortunately, some well educated people also doing that crime that is more shocking.
I have a request to those people who want only boys for their next kin that please adopt a baby boy and stop killing baby girls. If God is not giving you boy then whats the fault of girls in it. Why are you killing them ?
But Remember, today you don't need a girl but when your boy will be 25 or 27 years old you will need a girl as daughter in law then how you will accept it ? If all people will hate the baby girls then where you'll find daughter in law ?
So people , be educated and behave like a human . Save the girls to save this world because world won't run without women. If this human world is a bycycle then men and women are two wheels of it and a bycycle couldn't run with one wheel.
If you are agree to save girls please share it to all around the world ....

JUST TRUST ON YOUR WIFE

SAVE YOUR RELATIONSHIP

There is so many people who always blame on their wife because of a little misunderstanding which is not good at all. The relationship of a couple based on trust and respect between each others .
If your friend or family menber told you that your wife is cheating you or she has an affair then what will be your first reaction ? Of course you will ignore it if you love her really and have trust on her. In other side if you don't have trust on your wife then you will get angry and start fighting with your wife. I think this is wrong way to treat your wife . How can you destroy all trust because your friends tell you something ? How can you start doubting on your wife easily if she is satisfied having you in her life ?
Remember , always wife is not wrong and always friends are not correct sometimes they could have also misunderstanding.
Maybe your friends felt jealous from your happy married life that is why he or she puts some fire of misunderstanding in your relationship.
So guys if someone telling you something bad about your life partner then don't react bad instantly. Just listen your friends and calmly think about it. If you feel that your wife could cheat you then go to her and ask frequently everything and try to know what's in her mind. Don't forget to tell her that you are not doubt on her but your friends put these doubting points in your mind.
Once you will talk to your wife she will clear all your doubts. So keep your relationship strong and never let someone destroy it for fake information..
Good luck.

महिला सुरक्षा से समझौता और नहीं

  गलत नियत वालों को मौका और नहीं अब और नहीं महिला सुरक्षा से समझौता और नहीं अब और नहीं जागो हे भारत की बेटियों अब तो नींद से जागो तुम अपनी स...

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