कुछ समय बाद हम सब एक नये वर्ष में प्रवेश कर जाएंगे। हर साल जब हम किसी नये साल में प्रवेश करते हैं तो उम्मीद करते हैं कि आने वाला साल पिछले साल की तुलना में सुखदायक होगा और आगे बढने के कुछ नये अवसर भी विकसित होंगे। पुराना साल जब बीतने वाला होता है तो हम अपने आप से वादा करते हैं कि आगे के वर्ष में हम पहले से ज्यादा मेहनत करेंगे , प्रेम से रहेंगे और दोस्तों तथा परिवार के सदस्यों के मन में जो भी मनमुटाव होगा उसे दूर करेंगे, नौकरी में सफलता हासिल करेंगे , औरतों का सम्मान करेंगे वगैरह वगैरह।
इन सबमें जो सबसे बडा मुद्दा है वह है औरतों का सम्मान। इंसान कितना भी विकास के पथ पर आगे बढ रहा है लेकिन कहीं न कहीं औरतों के सम्बन्ध में जो पुरानी दकियानूसी सोच है वह मर्दों में पीढी दर पीढी स्थानांतरित हो रही है। अब देख लीजिए नये साल के सेलिब्रेशन पर खुशी का इजहार करने के लिए लडकियों से छेडखानी की जाती है। कुछ लोगों ने सोच रखा होता है कि फला लडकी को नये साल पर प्रपोज करेंगे अगर हाँ करेगी तो ठीक वरना किसी न किसी तरह से उसको हासिल करना है। यह सोच है आजकल के नौजवानों की जो प्यार के नाम पर लडकियों को गलत तरीकों से हासिल करना चाहते हैं। जब कोई लडकी किसी का प्रेम अस्वीकार करती है तो वह उस प्रेमी की नजर में नफरत की पात्र बन जाती है और उसे नुकसान पहुँचाने का प्रयास किया जाता है। कभी कोई उन पर एसिड फेंकता है तो कोई बलात्कार करता है। आज भी मर्द औरतों को अपने बराबर का दर्जा नहीं देना चाहते बल्कि वे औरतों को एक इंटरटेनमेंट की ही चीज समझते हैं । हमें मर्दों की यही सोच बदलनी है।
हमें यह समझना होगा कि औरतों को भी अपनी इच्छा रखने का हक है , उन्हें भी इनकार करने का अधिकार है। औरतों के मन को समझने की जरुरत है।
नये साल में हम बस इतनी उम्मीद करते हैं लोग औरतों को इंसान समझें और उन्हें वह इज्ज़त दें जिनकी वे हकदार हैं।
हैप्पी न्यू ईयर।