महिला सुरक्षा

हर एक महिला की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी होनी चाहिए
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महिला सुरक्षा से समझौता और नहीं

 



गलत नियत वालों को मौका और नहीं अब और नहीं

महिला सुरक्षा से समझौता और नहीं अब और नहीं


जागो हे भारत की बेटियों अब तो नींद से जागो तुम

अपनी सुरक्षा परम लक्ष्य हो मन में गांठ ये बांधो तुम

प्यार के नाम पे जिस्म का सौदा और नहीं अब और नहीं


कभी जो देखो गलत निगाहें पहली बार में टोको तुम

छुए जो कोई गलत हाथ तो वहीं उसी पल रोको तुम

लापरवाही में फिर धोखा और नहीं अब और नहीं


गलत नियत वालों को मौका और नहीं अब और नहीं

महिला सुरक्षा से समझौता और नहीं अब और नहीं

लेखक : राज कुमार

कोलकाता केस पर सरकार मौन

 


कोलकाता में हुए महिला ट्रेनी डाक्टर के रेप और मर्डर मामले में लगभग बीस दिन होने को हैं लेकिन अभी तक सीबीआई और पुलिस के हाथों में कोई पुख्ता सुबूत नहीं लगा है जिससे अपराधियों तक पहुंचा जा सके। सिर्फ एक अपराधी पकडा गया है संजय राय लेकिन फारेंसिक रिपोर्ट के अनुसार रेप करने वाले एक से अधिक लोग हैं। अब संजय राय को मोहरा बनाया गया है या फिर वाकई में संजय ने अकेले इस अपराध को अंजाम दिया है अभी कुछ भी साफ नहीं हो पाया है। इस मामले को लेकर लगातार राजनीतिक पार्टियों में बयानबाजी हो रही है। मामला इतना लम्बा खिंच रहा है और सीबीआई जैसी जांच एजेंसी को भी इसमें सफलता नहीं मिल पा रही है तो जाहिर है कि इसमें बडे और पावरफुल लोगों का हाथ है। 

गौरतलब है कि घटना के बारे में पुलिस को बहुत देरी से खबर की गई और घटनास्थल पर सबूतों से छेडछाड की गई जो यह साबित करता है कि बहुत कुछ गडबड है। ये तो हाल है इतने हाईफाई केस का तो आप सोचिए जरा कि छोटे और कमजोर गरीब लोगों के साथ जब इस तरह के अपराध होते होंगे तो उन्हें कैसे इंसाफ मिल पाता होगा, मिलता ही नहीं होगा और अपराधी बेखौफ एक दूसरा अपराध करने के लिए तैयारी करने लगते हैं। क्या अब सरकार महिलाओं की सुरक्षा करने में असफल हो रही है? क्या महिलाओं को अब न्याय की उम्मीद छोड देनी चाहिए ? ये बडा सवाल है। आजकल लोगों के अंदर डर का माहौल है और लोग अपनी बेटियों को बाहर भेजने से भी डर रहे हैं कि कहीं उनके साथ कोई अप्रिय घटना न घट जाए। सोचिए ऐसे डर के माहौल में हमारी बहन बेटियाँ कैसे रहेगी । महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार को किस तरह के इंतजाम करने चाहिए आप कमेंट्स करके हमें जरूर बताइए और हाँ अपनी बहनों और बेटियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी अब आपको खुद लेनी होगी।

मुस्लिम महिलाओं का सम्मान

मुस्लिम महिलाओं के हक और सम्मान की सुरक्षा को देखते हुए कैबिनेट ने विधेयक "मुस्लिम वूमेन प्रोटेक्शन आफ राइट्स आन मैरिज " को हरी झंडी दे दी है। इस विधेयक का उद्देश्य उन मुस्लिम मर्दों को सबक सिखाना है जो छोटी छोटी बात पर अपनी पत्नी तलाक देने की धमकी देते हैं या तलाक दे देते हैं। इस कानून की रूपरेखा तैयार करने के लिए गृहमंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में मंत्रिमंडलीय कमेटी का गठन किया गया था।

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बयान दिया है कि ," प्रस्तावित कानून मुस्लिम समाज की महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के लिए है। कई राज्यों ने इस विधेयक का समर्थन किया है उम्मीद है कि यह इसी सत्र में पारित भी हो जाएगा।"

तीन तलाक अर्थात तलाक-ए-बिद्दत को कोर्ट ने पहले ही असंवैधानिक करार दिया है।यह उपरोक्त विधेयक पर आधारित कानून सिर्फ तीन तलाक के मामलों में ही क्रियाशील होगा तथा जम्मू एवं कश्मीर को छोडकर देश के हर राज्य में लागू होगा।

इस कानून का उल्लंघन करने वाले मर्दों को तीन साल तक की कैद और साथ ही साथ जुर्माने का भी प्रावधान है। इसके अलावा तलाक-ए-बिद्दत से पीडित महिलाओं को गुजारा भत्ता और नाबालिग बच्चों की कस्टडी लेने का अधिकार होगा।यह कानून बन जाने के बाद तीन तलाक का अपराध एक संगीन और गैर जमानती अपराध की श्रेणी में रखा जाएगा।

वास्तव में यह कानून उन मर्दों के मुँह पर तमाचा होगा जो अपनी पत्नी को खिलौना समझते हैं और तीन तलाक की आड में पुरानी पत्नी से छुटकारा पाकर नई शादी कर लेते हैं। इस कानून की एक और खास बात होगी कि तीन तलाक चाहे लिखित में , मौखिक में या किसी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम जैसे इंटरनेट, सोशल मीडिया से बोला गया हो सब एकसमान संगीन अपराध माने जाएंगे।

अन्य राजनीतिक दल भले ही इस कानून का किसी न किसी रूप में विरोध करें लेकिन सच यह हैं कि मुस्लिम महिलाओं को इस तरह के कानून की बहुत जरूरत है ।


सुरक्षित महिला सुरक्षित समाज

देश कोई भी हो सुरक्षित तभी समझा जाएगा जब वहां के बच्चे और औरतें सुरक्षित हों। कोई देश कितनी भी तरक्की क्यों न कर ले कितनी भी योजनाएं क्यों न चला ले लेकिन यदि सडकों पर चलने वाली महिला के मन में डर बना हुआ है कि कोई उसके गहने न छीन ले या गलत कमेंन्ट्स न कर दे या अगवा करके बलात्कार न कर दे तो वह देश या प्रदेश असुरक्षित ही कहा जाएगा।
जो सरकार महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सजग नहीं है वह ज्यादा दिन तक शासन नहीं कर सकती। एक सरकार के समर्थक से मेरी बात हुई तो उन्होंने मुझसे कहा कि आपको विकास दिखाई क्यों नहीं देता है सडकों का निर्माण हो रहा है , बिजली व्यवस्था भी पटरी पर लौट रही है और बेरोजगारी को भी दूर करने का प्रयास किया जा रहा है फिर आप कैसे कह रहे हैं कि प्रदेश या देश में महिलाएं सुरक्षित नहीं है। मैं खामोश रहा कुछ नहीं बोला।
अगले ही दिन उनकी 20 साल की बेटी शहर किसी काम से जा रही थी तो साथ में वो भी थे। मैने पूछा अरे सर कहाँ की तैयारी है? वो बोले बस बेटी को शहर हास्टल तक पहुँचाने जा रहे हैं।
मैनें कहा तो उनको बस में बैठा दीजिये वो चली जाएंगी आप क्यों परेशान हो रहे हैं? वो बोले अरे नहीं लडकी है अकेले जाना ठीक नहीं है रास्ता भी लम्बा है , माहौल ठीक नहीं है आजकल, इसलिए छोड कर आना ही ठीक होगा।
दरअसल, ये वही महानुभाव हैं जो कल सरकार की बडी बडी तारीफ कर रहे थे और कह रहे थे कि प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा के व्यापक इन्तजाम है लेकिन जब अपनी बेटी की सुरक्षा की बात आई तो खुद उन्होंने कबूल कर लिया कि प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा में अभी बहुत सारी कमियाँ हैं।
सिर्फ़ योजनाओं का निर्माण कर देना ही सरकार का फर्ज नहीं है बल्कि उस योजना पर सरकार की तब तक जिम्मेदारी होनी चाहिए जब तक कि उसका क्रियान्वयन न हो जाए और वह योजना सफल न हो जाए। असफल योजनाओं की समीक्षा करके पुनः नई तैयारी के साथ नई योजना लानी चाहिए और लागू करना चाहिए। ऐसा तब तक होते रहना चाहिए जब तक कि योजना सफल न हो जाए।

महिला सुरक्षा से समझौता और नहीं

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