तरह तरह के कायर देखे
पूछने का अब दिल करता है
गर्भ में इक बेटी को मारना
किस श्रेणी की कायरता है
ऐ समाज मुझको तू आज
इक बात जरा खुल के समझा
तेरा ये इंसाँ मार के बेटी
बेटों पर ही क्यों मरता है
या मेरे रब तू जाने सब
फिर क्यों जुल्म ये होता है
क्या तेरा इंसान आजकल
तुझसे भी नहीं डरता है
इस धरती पर सर्वश्रेष्ठ
हम खुद को मानव कहते हैं
अपनी बच्ची की ही हत्या
अरे यह कैसी मानवता है
कूडेदान में देखता हूँ जब
नवजात बच्चियों की लाशें
आग लगा दूँ दुनिया भर को
कुछ ऐसा मन करता है
तरह तरह के कायर देखे
पूछने का अब दिल करता है
गर्भ में इक बेटी को मारना
किस श्रेणी की कायरता है