महिला सुरक्षा

हर एक महिला की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी होनी चाहिए
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नारी भी हो आजाद वो हिन्दुस्तान चाहिए

हमको भी हक चाहिए वो सम्मान चाहिए

नारी भी हो आजाद वो हिन्दुस्तान चाहिए

वो धरती चाहिए जिसपे हम फूलें और फलें

हों सुरक्षित जिसके नीचे वो आसमान चाहिए

ना सुन्दर पति चाहिए ना चाहिए धनवान

जो समझे हमको बस वो इक इंसान चाहिए

सह सहकर जुल्मों सितम बेदर्द दुनिया के

लब सूख चुके हैं इन पर अब मुस्कान चाहिए

गर अग्नि परीक्षा लेना है शौक मर्दों का

तो हमको भी मर्दों का  इम्तिहान चाहिए

कब तक हम जानी जाएंगी मर्दों के नाम से

हमको भी तो अपनी इक पहचान चाहिए

हमको भी हक चाहिए वो सम्मान चाहिए

नारी भी हो आजाद वो हिन्दुस्तान चाहिए

बेटियों से ही क्रांतिकारी परिवर्तन सम्भव



उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने प्रदेशवासियों को संदेश दिया कि बेटियों को बेटों से कम न समझे और उनमें किसी तरह का भेदभाव करना उचित नहीं है क्योंकि बेटियों में भी उतनी ही क्षमता होती है जितनी कि बेटों में।



इधर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने भी बेटियों को सम्मान और हक देने की बात कही और यहां तक कहा कि एक बेटी लगभग दस बेटों के बराबर होती है।

हम देश भर की महिलाओं और बेटियों की तरफ से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री जी को उनकी इस बडी और अच्छी सोच के लिए धन्यवाद करते हैं और यह उम्मीद भी करते हैं कि कथनी और करनी में फर्क नहीं होगा और महिलाओं की सुरक्षा की उचित व्यवस्था की जाएगी।

लडकियों को भी मौके मिलने चाहिए

दुनिया दिनों दिन आगे बढती जा रही है लेकिन हमारे देश में लोग आज भी पुरानी रूढिवादी सोच से जकडे हुए हैं। जहाँ एक तरफ विकसित देशों की महिलाएं पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ रही हैं और अपने परिवार के साथ साथ देश का नाम भी रोशन कर रही हैं वहीं भारत में आज भी बेटों की चाहत में बेटियों की बलि दी जाती है। यहां पर यदि कोई लडकी पढना लिखना चाहती है, अपने सपने पूरे करना चाहती है तो परिवार के लोग ही साथ नहीं देते।समाज के लोग लडकियों का हौसला बढाने की जगह उनकी हिम्मत तोडने का काम कर रहे हैं।

काबिलियत होने के बावजूद भी देश की बेटियों को न जाने कितनी समस्याओं का सामना करना पडता है। लडकियां एक हद तक परम्परागत समाज से लड भी लेती हैं लेकिन जब उनके परिवार के लोग ही साथ छोड देते हैं तो उनकी हिम्मत टूटने लगती है। वैसे भी एक लडकी के लिए अपने सपने पूरे करने के लिए पुराने विचारों वाले अपने ही परिवार से लडना आसान नहीं होता।

पेशेवर रेसलर "कविता दलाल" का कहना है ," समाज की रूढिवादी सोच से लडना आसान नहीं होता।लडकियों के मामले में तो यह और भी मुश्किल है लेकिन एक शुरुआत करनी होती है जो मैनें और मेरे परिवार ने की।मेरी सफलता को आज सम्मान मिल रहा है जिससे यह साबित होता है कि अच्छी शुरुआत अच्छा परिणाम जरूर देती है।"

कविता भी उन लडकियों में से एक हैं जिन्हें समाज की बुरी बातों और तानों का सामना करना पडा । उन्हें भी कहा गया कि रेसलिंग उनके वश की बात नहीं है क्योंकि वो एक लडकी हैं लेकिन कविता ने हार नहीं मानी ,उन्हें परिवार का सपोर्ट मिला और उन्होंने सलवार कमीज में ही रेसलिंग करने का फैसला किया। समाज की बाधाओं को अपनी हिम्मत और हौसले से पार करते हुए कविता आज एक सफल रेसलर हैं।

भारत की हर बेटी में वो जुनून है ,वो आग है कि वो सानिया मिर्ज़ा, कविता दलाल, पी.वी.सिन्धू, दीपिका कुमारी, मिताली राज,साइना नेहवाल, अश्विनी पोनप्पा आदि लडकियों की तरह सफलता की नई इबारत लिख सकती हैं और अपने साथ अपने देश का नाम भी रोशन कर सकती हैं। बस जरूरत है तो उन पर विश्वास करने की और उन्हें पर्याप्त मौके देने की। एक बेटी में भी उतनी ही क्षमता होती है जितनी कि एक बेटे में। इसलिए हर शिक्षित इंसान का फर्ज है कि उन्हें जब भी मौका मिले वो अशिक्षित,नादान और पुरानी सोच वाले ग्रामीण इंसान को समझाने का प्रयास करें कि बेटियाँ बेटों से कम नहीं होती ताकि वो लडकी और लडके मे भेद न करें तथा लडकियों को भी लडकों की तरह पढने लिखने का मौका मिले।

औरत से घर बनता है

"यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते , रमन्ते तत्र देवता: ।"

उपर्युक्त श्लोक की लाइन का अर्थ है कि जिस स्थान पर स्त्रियों की पूजा होती है अर्थात सम्मान होता है उस स्थान पर स्वयं देवताओं का निवास होता है।

यह कलयुग है इसलिए शायद देवता किसी स्थान पर प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखे जाते लेकिन इतना जरूर अन्दाजा लगाया जा सकता है कि जिस स्थान पर सुख मिले, शान्ति मिले और खुशी तथा प्रेम का वातावरण हो वहां पर अवश्य ही देवता निवास करते होंगे। इस प्रकार से कलयुग में भी उपर्युक्त श्लोक की लाइन बहुत ही सटीक बैठती है। आपने देखा होगा कि जिस घर में औरतें खुश नहीं रहतीं है या जिस घर में औरतों को गालियां दी जाती हैं या भेदभाव किया जाता है उस घर के लोग शान्ति महसूस नहीं कर पाते, सुख की रोटियां नहीं खा पाते। कुल मिलाकर पूरे घर में कलह और द्वेष ही फैला होता है। परिवार का हर सदस्य अपने बारे में ही सोचते है हमेशा एक दूसरे को नीचा दिखाने और बुराई करने में ही लगे होते हैं।

वहीं दूसरी तरफ यदि किसी घर में महिलाओं का सम्मान होता है , हर मसले में उनकी राय ली जाती है और वे खुश रहती हैं तो उस घर में खुशियाँ ही निवास करती हैं। परिवार का हर सदस्य एक दूसरे के बारे में अच्छी और सकारात्मक सोच रखता है।इससे घर में एकता बनी रहती है ।यदि परिवार का एक सदस्य नाराज है तो हर सदस्य उस एक को मनाने में लग जाता है। यही असली खुशी होती है।

याद रखिए, मर्दों से कभी घर नहीं बनता ।घर को सिर्फ औरतें ही घर बनाती हैं। वो जितनी खुश रहेंगी घर भी उतना ही खूबसूरत होगा और यदि घर खूबसूरत होगा तो अवश्य ही देवता उसमें निवास करना चाहेंगे।

इसलिए औरतों का सम्मान कीजिए, उन्हें गालियां मत दीजिए ,गन्दी भाषा का प्रयोग मत कीजिए। औरत को सम्मान के गहनों से सजाइये

और अपने घर को वास्तव में घर बनाइए।

औरतों को चलो सम्मान से पुकारा जाए

ना कुछ तुम्हारा जाए ना कुछ हमारा जाए
औरतों को चलो सम्मान से पुकारा जाए

जन्म से लेकर प्यार ही दिया है औरत ने
करके इज्ज़त इनकी थोडा कर्ज उतारा जाए

जंग जो जारी है इनके प्यार हमारी नफरत में
जीत जाएं ये इसलिए चलो खुद हारा जाए

फूंक दो दुनिया की सारी रूढिवादी सोच
इससे पहले गर्भ में किसी कन्या को मारा जाए

औरतें फूल हैं इस दुनिया के गुलशन की
आओ इन फूलों को मोहब्बत से निखारा जाए

ना कुछ तुम्हारा जाए ना कुछ हमारा जाए
औरतों को चलो सम्मान से पुकारा जाए

हमको भी हक चाहिए

हमको भी हक चाहिए वो सम्मान चाहिए
नारी भी हो आजाद वो हिन्दुस्तान चाहिए

वो धरती चाहिए जिसपे हम फूलें और फलें
हों सुरक्षित जिसके नीचे वो आसमान चाहिए

ना सुन्दर पति चाहिए ना चाहिए धनवान
जो समझे हमको बस वो इक इंसान चाहिए

सह सहकर जुल्मों सितम बेदर्द दुनिया के
लब सूख चुके हैं इन पर मुस्कान चाहिए

गर अग्नि परीक्षा लेना है शौक मर्दों का
तो हमको भी मर्दों का इम्तिहान चाहिए

कब तक हम जानी जाएंगी मर्दों के नाम से
हमको भी तो अपनी इक पहचान चाहिए

हमको भी हक चाहिए वो सम्मान चाहिए
नारी भी हो आजाद वो हिन्दुस्तान चाहिए

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