महिला सुरक्षा

हर एक महिला की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी होनी चाहिए
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औरत से घर बनता है

"यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते , रमन्ते तत्र देवता: ।"

उपर्युक्त श्लोक की लाइन का अर्थ है कि जिस स्थान पर स्त्रियों की पूजा होती है अर्थात सम्मान होता है उस स्थान पर स्वयं देवताओं का निवास होता है।

यह कलयुग है इसलिए शायद देवता किसी स्थान पर प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखे जाते लेकिन इतना जरूर अन्दाजा लगाया जा सकता है कि जिस स्थान पर सुख मिले, शान्ति मिले और खुशी तथा प्रेम का वातावरण हो वहां पर अवश्य ही देवता निवास करते होंगे। इस प्रकार से कलयुग में भी उपर्युक्त श्लोक की लाइन बहुत ही सटीक बैठती है। आपने देखा होगा कि जिस घर में औरतें खुश नहीं रहतीं है या जिस घर में औरतों को गालियां दी जाती हैं या भेदभाव किया जाता है उस घर के लोग शान्ति महसूस नहीं कर पाते, सुख की रोटियां नहीं खा पाते। कुल मिलाकर पूरे घर में कलह और द्वेष ही फैला होता है। परिवार का हर सदस्य अपने बारे में ही सोचते है हमेशा एक दूसरे को नीचा दिखाने और बुराई करने में ही लगे होते हैं।

वहीं दूसरी तरफ यदि किसी घर में महिलाओं का सम्मान होता है , हर मसले में उनकी राय ली जाती है और वे खुश रहती हैं तो उस घर में खुशियाँ ही निवास करती हैं। परिवार का हर सदस्य एक दूसरे के बारे में अच्छी और सकारात्मक सोच रखता है।इससे घर में एकता बनी रहती है ।यदि परिवार का एक सदस्य नाराज है तो हर सदस्य उस एक को मनाने में लग जाता है। यही असली खुशी होती है।

याद रखिए, मर्दों से कभी घर नहीं बनता ।घर को सिर्फ औरतें ही घर बनाती हैं। वो जितनी खुश रहेंगी घर भी उतना ही खूबसूरत होगा और यदि घर खूबसूरत होगा तो अवश्य ही देवता उसमें निवास करना चाहेंगे।

इसलिए औरतों का सम्मान कीजिए, उन्हें गालियां मत दीजिए ,गन्दी भाषा का प्रयोग मत कीजिए। औरत को सम्मान के गहनों से सजाइये

और अपने घर को वास्तव में घर बनाइए।

बेटी ही घर की लक्ष्मी है

हर तरफ दीपावली की खुशियाँ हैं और हर कोई अपने अपने घर की साफ सफाई में लगा हुआ है क्योंकि हिन्दू समाज में यह मान्यता है कि दीपावली के दौरान जब हर तरफ रोशनी ही रोशनी दिखाई देती है उस दिन माता लक्ष्मी दुनिया के भ्रमण पर निकलती हैं और यह देखती हैं कि कौन सा घर सबसे ज्यादा सुन्दर और साफ सुथरा है। ऐसा माना जाता है कि जो घर माता लक्ष्मी को पसंद आ जाता है वे उसी घर में बस जाती हैं और उस घर में कभी अन्न धन की कमी नही होती है।
लालच में पडकर लोग माँ लक्ष्मी की प्रतीक्षा करते हैं जबकि सच तो यह है लक्ष्मी तो पहले से ही हर घर में मौजूद रहती हैं कभी बेटी के रूप में तो कभी माँ, बहन और बीवी के रूप में। आज लालची इंसान अपने स्वार्थ में इस तरह खो चुका है कि वह माता लक्ष्मी को सिर्फ धन दौलत के रूप में ही पहचानता है। सिर्फ धन दौलत के रूप में माता लक्ष्मी को सीमित करना हम इंसानों की छोटी सोच को दर्शाता है।
अगर हम वास्तव में चाहते हैं कि माता लक्ष्मी हमारे घरों में निवास करें तो सबसे पहले उनके अन्य रूपों को पहचानना होगा। महिलाओं की इज्ज़त करनी होगी चाहे वह अपने घर की हों या किसी और के घर की। हर नारी में लक्ष्मी होती हैं और हर नारी में शक्ति। जो इंसान नारी की इज्ज़त नही करता वह दीपावली में चाहे कितना भी अपने घर को साफ और सुन्दर बना लें चाहे कितनी भी पूजा अर्चना कर ले , माता लक्ष्मी उसके घर में कभी भी प्रवेश नहीं करेंगी और यदि कर भी लिया तो वहां रुकेंगी नहीं, तुरन्त चली जाएंगी।
याद रखिए एक माँ ही परिवार में रिश्तों की नींव का निर्माण करती है, एक बहन ही हमारे झूठ में भी हमारा साथ देती है, एक बीवी ही जीवन को खूबसरती से भरती है और एक बेटी ही अपने साथ खुशियों की सौगात लाती है।क्या विभिन्न रूपों में हमारे जीवन में शामिल ये सब औरतें किसी लक्ष्मी से कम हैं ? जिसकी जिन्दगी में ये सब हैं वह तो पहले से ही धनवान है और जिसकी जिन्दगी में ये सब नहीं हैं वह तो धनवान होते हुए भी दरअसल बहुत गरीब है।
तो इस दीपावली आपसे गुजारिश है कि बेशक माता लक्ष्मी की पूजा कीजिए पर साथ ही साथ घर की लक्ष्मी औरतों का भी सम्मान कीजिए, उनकी इज्ज़त कीजिए ।
दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।

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