भारत में बेटियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अब मन में सवाल गहरे हो रहे हैं। बलात्कारियों का हौसला इस कदर बढ चुका है कि वो अपराध करने से बाज नहीं आ रहे हैं। पहले दुष्कर्म करने के बाद पीडिता को जिन्दा छोड देते थे इसलिए कम से कम वो इंसाफ के लिए कानून का दरवाजा तो खटखटा सकती थी लेकिन अब तो हैवानियत इतनी बढ चुकी है कि बलात्कार तो करते ही हैं पीडिता को जला कर मार दे रहे हैं ताकि कोई सबूत न बचे। यह अपराध अब हत्या के अपराध से भी ज्यादा जघन्य और हैवानियत भरा हो चुका है। ये राक्षसी प्रवृत्ति के लोग आखिर कहां से आ गए हैं जो बेटियों को अपनी हवस का शिकार बना कर उनकी जिन्दगी छीन रहे हैं।
सबसे बडी तकलीफ तब होती है जब पीडिता के पक्ष को कानून सुनना ही नहीं चाहता है। हर बार लगभग ऐसा ही होता है कि कोई बाप या भाई किसी लडकी के गुमशुदा होने की रिपोर्ट दर्ज कराने जाता है तो पुलिस आनाकानी करती है और तरह तरह के तर्क देती है कि वह किसी के साथ भाग गई होगी .. आ जाएगी वगैरह वगैरह। अबे तेरे पास कोई मदद के लिए गया है तो उसकी मदद कर , रिपोर्ट दर्ज कर और तुरंत कार्यवाही कर , हो सकता किसी मासूम की जिन्दगी बच जाए। पुलिस की कामचोरी और घूसखोरी किसी से छुपी नहीं है। कई मामलों में तो ऐसा भी देखने को मिलता है कि पीडिता के पहुँचने से पहले अपराधी ही थाने पहुँचकर नोटों के बण्डल पकडा देता है तो पुलिस अपने आप अंधी और बहरी हो जाती है न उसे कुछ सुनाई देता है न कुछ दिखाई देता है।
हम सरकार से यही गुजारिश करना चाहते हैं कि पुलिस को यह आदेश हो कि लडकियों व औरतों के मामले में मामला किसी भी क्षेत्र का हो और कैसा भी हो तुरंत एफआईआर दर्ज हो और त्वरित कार्यवाही शुरू हो। जैसा कि हैदराबाद वाले केस में हुआ कि पुलिस ने रिपोर्ट इसलिए दर्ज नहीं की क्योंकि मामला उनके क्षेत्र में नहीं आता है। अब यह बहानेबाजी बन्द होनी चाहिए और व्यवस्था ऐसी हो कि औरतों और बच्चियों के सम्बंध में जो भी नजदीकी पुलिस चौकी या थाना हो वहां पर बिना किसी सवाल के रिपोर्ट दर्ज हो और तुरंत एक्शन लिया जाए। पुलिस की थोडी सी सतर्कता किसी मासूम की जिन्दगी बचा सकती है।
