महिला सुरक्षा

हर एक महिला की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी होनी चाहिए

महिला दिवस की बधाइयां



नारी और पुरूष इस संसार रूपी गाडी के दो पहिए के समान है । यदि संसार की इस गाडी के दोनों पहियों में से किसी एक को भी अलग कर दिया जाए तो संसार की कल्पना नहीं की जा सकती है। ऐसे में जरूरी है कि नारी और पुरूष दोनों को एकसमान हक और अधिकार मिले। अक्सर हमारे प्राचीन भारतीय समाज में देखा गया है कि पुरुषों को नारियों की तुलना में ज्यादा अधिकार और सम्मान मिले हैं लेकिन जैसे जैसे समाज आगे बढा है नारियों की दशा में सुधार हुए हैं । यदि कुछ मामलों को छोड दिया जाए तो आज के आधुनिक समाज में नारियां पुरूषों से किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है और ऐसा होना भी चाहिए।
आज अन्र्तराष्ट्रीय महिला दिवस है तो हम सब को चाहिए कि नारियों के सम्मान में कुछ न कुछ करने की पहल करें। यदि कुछ भी नहीं कर सकते तो कम से कम दूसरों के घरों की महिलाओं की इज्ज़त उसी तरह से करें जैसी अपने घर की महिलाओं की करते हैं। महिलाएं आगे बढ रही हैं लेकिन उन्हें समाज के प्रोत्साहन की जरूरत है हमारे सपोर्ट की जरूरत है जिससे उनका कभी हौसला न टूटे। तो आइए आज हम प्रण करते हैं कि किसी भी महिला के साथ कभी भी कोई दुर्व्यवहार नहीं करेंगे और न होने देंगे। उन्हें पूरी इज्ज़त देंगे और पूरा सम्मान करेंगे।

अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर बधाइयां।

देर सही पर इंसाफ हुआ


निर्भया कांड मामले में देर से ही सही लेकिन इंसाफ मिल चुका है। दिल्ली की अदालत ने चारों आरोपियों को 22 जनवरी 2020 को सुबह सात बजे फाँसी पर लटकाने का आदेश जारी किया है। अदालत के इस फैसले से लोगों का अदालत और कानून पर थोडा विश्वास मजबूत होगा और उन मानसिक विकृति के लोगों में थोडा सा खौफ भी पैदा होगा जो लडकियों और छोटी बच्चियों पर हवस भरी गन्दी निगाह रखते हैं। 
आपको बता दें कि दिसंबर 2012 में एक 23 वर्षीय पैरामेडिकल छात्रा से 6 लोगों ने हैवानियत की हदें पार करते हुए सामूहिक दुष्कर्म करके उसे बुरी तरह घायल करके मरणासन्न अवस्था में सडक के किनारे फेंक दिया था। सभी आरोपियों में से एक आरोपी राम सिंह जेल में ही आत्महत्या कर चुका है जबकि एक आरोपी नाबालिग था जिसे तीन साल की सजा सुनाई गई थी जिसकी सजा पूरी हो चुकी है और उसे दिसंबर 2015  में रिहा भी किया जा चुका है। अब बाकी बचे चारों आरोपियों का भी डेथ वारंट जारी कर दिया गया है। हालांकि अपराधियों के पास अभी भी उपचारात्मक याचिका दायर करने का विकल्प  खुला हुआ है।
देश भर में लगातार बढ रही दुष्कर्म की घटनाओं को देखते हुए इन चारों आरोपियों की फाँसी एक सबक साबित हो सकती है। आरोपियों को पता चलना चाहिए कि औरतों और मासूम बच्चियों पर अब किसी भी तरह का अत्याचार बर्दाश्त नहीं हो सकेगा और हर आरोपी चाहे वह बडे रसूख वाला हो या कम, उसे कडी से कडी सजा मिलेगी। हम निर्भया को तो वापस नहीं ला सकते पर इस  फाँसी से पीडिता के परिवार और देश की जनता को थोड़ी सी शान्ति और राहत जरूर महसूस होगी। 
हम देश की हर महिला और बच्ची के लिए सुरक्षित माहौल की कामना करते हैं।

Photo source:Dainik jagran

महिला सुरक्षा से समझौता और नहीं

  गलत नियत वालों को मौका और नहीं अब और नहीं महिला सुरक्षा से समझौता और नहीं अब और नहीं जागो हे भारत की बेटियों अब तो नींद से जागो तुम अपनी स...

Popular Posts