महिला सुरक्षा

हर एक महिला की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी होनी चाहिए

बेटियां

हीरे हैं बेटे गर तो मोती हैं बेटियां

हर इक घर की लक्ष्मी होती हैं बेटियां


रिश्ते तोडना तो अक्सर आदत है बेटों की

हर रिश्ते को इक धागे में पिरोती हैं बेटियां


परिवार में सबकी फिकर रहती है इनको

सबको सुला के आखिर में सोती हैं बेटियां


इक ओर बडे होकर माँ बाप को रुलाते हैं बेटे

तो माँ बाप के लिए जीवन भर रोती हैं बेटियां





हीरे हैं बेटे गर तो मोती हैं बेटियां


हर इक घर की लक्ष्मी होती हैं बेटियां

बेचारी बेटियां

जन्म हुआ बेटी का
जैसे मरन हुआ है किसी का
ऐसा आलम है घर मे
मुँह लटका है सभी का
थोडी बडी हुयी बेटी
चिँता लगी सताने
कैसे होगा ब्याह सोचकर
सिर लगा बाप खुजलाने
कोस रहा है माँ को क्यो बेटी जन्मी तूने
कहाँ से आयेगा दहेज
हर चीज के दाम हुए दूने
जैसे तैसे ब्याह हुआ
और गयी बेटी ससुराल
सुनकर ताने सास ननद के
हुआ बुरा फिर हाल
सास कहे आराम न कर तू
काम करा कर तेज
ननद कहे कि आखिर तू
कम क्योँ लायी दहेज
बीता समय हुयी गर्भवती जब
फिर से यही दबाव कि
कुछ भी करना बेटी न जन्मना
बेटा होगा तो होगा रोशन घर का नाम
बेटी आयी तो बिगडेगा बनता सारा काम
आखिर हुआ जनम फिर बेटी का
सभी हुये हलकान
सिर पे रख के हाथ आज फिर
है पूरा घर परेशान

माँ रोये दिन रात सोचकर
सिर्फ एक ही बात
होगा वही फिर बेटी सँग जो हुआ था मेरे साथ
आखिर कब बदलेगी सोच जमाने की
कब होगी कम लालसा बेटा पाने की

कब तक कोसी जायेँगी ये प्यारी बेटियाँ
बेचारी बेटियाँ ।

बलात्कारियों को फाँसी दो

दुनिया में शायद ही कोई ऐसा परिवार होगा जिस परिवार में बेटियां नही हो और हर परिवार अपने घर की बेटी की सुरक्षा को लेकर गम्भीर रहता है। हर बेटी का बाप चाहता है कि उसकी हमेशा सुरक्षित रहे,और हर बहन का भाई चाहता है कि उसकी बहन सडकों पर ,कालेज में सुरक्षित महसूस करे। पर यह होगा कैसे ? क्या सिर्फ सरकार के सुरक्षा इन्तजाम काफी हैं इसके लिए ? जी नहीं, दरअसल जब तक हर मर्द के मन में लडकियों के लिए सम्मान की भावना विकसित नहीं होगी कोई भी नियम और सरकारी कानून हमारी बहन , बेटियों को सुरक्षित नही कर सकता।
महिलाओं में इस बलात्कार रूपी राक्षस का डर इस कदर भर गया है कि कोई भी महिला अकेले कहीं आने जाने से पहले चार बार सोचती है।हमारे देश की बेटी आज सडकों पर उतर कर न्याय मांग रही है, हमारे देश की बहनें आज पोस्टर लेकर महिलाओं साथ हो रहे बलात्कार के विरोध में प्रदर्शन कर रही हैं। यह सारी चीजें दर्शाती हैं कि हमारे देश हमारी दुनिया में महिलाएं कितनी असुरक्षित हैं।
सडकों , बाजारों की बात ही छोड दीजिए लडकियाँ कहीं पर भी सुरक्षित नही हैं।आज समाज इतना अधिक दूषित हो चुका है कि सगे रिश्ते भी कलंकित होते जा रहे हैं। समाचार पत्रों में अक्सर पढने को मिलता है कि शराबी बाप ने बेटी की इज्ज़त तार तार की या चचेरे भाई ने ही बहन का यौन शोषण किया । बदलते समय के साथ लोगों की सोच गन्दी होती जा रही है। हम अक्सर बाजारों में देखते हैं कि अधेड मर्द जिसकी खुद की भी जवान बेटी होती है ,जब किसी दूसरे घर की लडकियों को देखता है तो कहता है वाह क्या मस्त आइटम है।यह सब किसकी देन है ? मोबाइल, इंटरनेट या जिसकी भी देन हो लेकिन आने वाले समय में हालात और भी बदतर होने वाले हैं। अगर ऐसा ही चलता रहा तो एक दिन सडकों पर सिर्फ मर्द ही नजर आएंगे।
अभी भी वक्त है हालात सुधारे जा सकते हैं । हमारी लोगों से अपील है कि यदि आप सब कहीं पर भी किसी लडकी के साथ हो रही बदतमीजी या छेडखानी को देखें तो कृपया नजरअंदाज न करें। यह ना सोचें कि यह लडकी हमारे घर की नहीं है तो हम क्यों मदद करें। याद रखिए आज यदि किसी और की बेटी है तो कल उसी जगह पर आपकी बेटी या बहन भी हो सकती है।
फिर भी यदि आप अपने आपको कमजोर समझते हैं , लडकियों पर होते अत्याचार को देखते हुए भी आप में कुछ करने की हिम्मत नहीं है तो कम से कम पुलिस को इन्फार्म जरूर कर दें। अगर इतना भी आपसे ना हो पाए तो कृपया कम से कम बलात्कार के विरोध में प्रदर्शन करती लडकियों का साथ जरूर दे ,उनके साथ जरूर खडे हों। आपको देखकर उनका हौसला तो बढेगा।
अब सिर्फ एक ही नारा होना चाहिए..
ना इज्ज़त ना शाबाशी दो
बलात्कारियों को फाँसी दो।

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