जन्म हुआ बेटी का
जैसे मरन हुआ है किसी का
ऐसा आलम है घर मे
मुँह लटका है सभी का
थोडी बडी हुयी बेटी
चिँता लगी सताने
कैसे होगा ब्याह सोचकर
सिर लगा बाप खुजलाने
कोस रहा है माँ को क्यो बेटी जन्मी तूने
कहाँ से आयेगा दहेज
हर चीज के दाम हुए दूने
जैसे तैसे ब्याह हुआ
और गयी बेटी ससुराल
सुनकर ताने सास ननद के
हुआ बुरा फिर हाल
सास कहे आराम न कर तू
काम करा कर तेज
ननद कहे कि आखिर तू
कम क्योँ लायी दहेज
बीता समय हुयी गर्भवती जब
फिर से यही दबाव कि
कुछ भी करना बेटी न जन्मना
बेटा होगा तो होगा रोशन घर का नाम
बेटी आयी तो बिगडेगा बनता सारा काम
आखिर हुआ जनम फिर बेटी का
सभी हुये हलकान
सिर पे रख के हाथ आज फिर
है पूरा घर परेशान
माँ रोये दिन रात सोचकर
सिर्फ एक ही बात
होगा वही फिर बेटी सँग जो हुआ था मेरे साथ
आखिर कब बदलेगी सोच जमाने की
कब होगी कम लालसा बेटा पाने की
कब तक कोसी जायेँगी ये प्यारी बेटियाँ
बेचारी बेटियाँ ।
महिला सुरक्षा
हर एक महिला की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी होनी चाहिए
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