बीएचयू, वाराणसी
उत्तर प्रदेश।
वाराणसी में छात्राओं ने आए दिन अपने साथ हो रही छेडखानी के विरोध में धरना प्रदर्शन क्या शुरू किया सरकार और पुलिस प्रशासन की नींद उड गई है। यह वह मोदी और योगी की सरकार है जो चुनाव से पहले प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बहुत जागरूक नजर आ रही थी मगर जैसे ही यह सरकार सत्ता में आई अन्य सरकारों की तरह यह भी अपने वादे भूल गई।
जिसका परिणाम यह हुआ कि छात्राओं को खुद अपने साथ हो रही छेडखानी का विरोध करने के लिए आगे आना पडा।
मामला है 21 सितंबर का जब दृश्य संकाय की एक छात्रा के साथ भारत भवन के पास छेडखानी की गई और उस छेडखानी से आक्रोशित छात्राएं विरोध करने के लिए त्रिवेणी हास्टल से सडकों पर उतर आईं । छात्राओं की मांग सिर्फ इतनी थी कि कुलपति स्वयं आकर उनको आश्वासन दें और सुनिश्चित करें की आगे से इस तरह की छेडखानी घटनाएं नहीं होगी लेकिन कुलपति ने यह आश्वासन देने आने के लिए साफ मना कर दिया ।जिससे आक्रोशित छात्राओं ने कुलपति आवास के पास भी नारे लगाना जारी रखा तो बीएचयू के सुरक्षा कर्मचारियों ने उन पर लाठीचार्ज कर दिया जिसमें कई छात्राएं बुरी तरह से घायल हो गई।
जब यह सूचना संस्थान के बाकी छात्रों को हुई तो वे सुरक्षा कर्मचारियों की इस हरकत से और भी उग्र हो गए।
अब तक बात पुलिस प्रशासन तक पहुंच चुकी थी और सिपाही गश्त पर आ चुके थे।छात्राओं पर हुए लाठीचार्ज के विरोध मे जब छात्र सामने आए तो पुलिसकर्मियों द्वारा उन पर भी लाठियां भांजी गई।
अपनी असफलता को छुपाने के लिए छात्रों पर लाठीचार्ज करवाना कहां का न्याय है। क्या कोई अपनी सुरक्षा को लेकर धरना भी नहीं दे सकता है। अधिकारियों का कहना है कि छात्रों ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और डीएम के साथ बदसलूकी की जिसके चलते उन पर लाठीचार्ज किया गया हम पूछते हैं कि आप लोग एक बार थोडी सी बदसलूकी से इतना खफा हो गए कि छात्रों और छात्राओं पर लाठीचार्ज करवा दिए , जरा उन लडकियों से भी उनका दर्द पूछिए जो हर रोज दिन भर में न जाने कितनी बार सडक छाप मजनुओं की बदसलूकी सहती हैं उन पर क्या बीतती होगी। छात्राओं ने अपने ऊपर हो रही बदसलूकी को रोकने और विश्वविद्यालय प्रशासन,सरकार तथा पुलिस प्रशासन को जगाने के लिए धरना प्रदर्शन शुरू किया तो आप लोगों ने उल्टा उन्हें ही बदतमीज घोषित कर दिया और बदसलूकी का इल्जाम लगाकर लाठीचार्ज करवा दिया। ये तो भाई हद हो गई आपने तो छात्राओं को सीधा सीधा जवाब दे दिया कि हम तुम लोगों की रक्षा नहीं कर सकते और तुम्हें धरना प्रदर्शन भी नहीं करने देंगे।
क्या योगी जी और मोदी जी बता सकते हैं कि उनका एन्टी रोमियो स्क्वाड कहाँ है ? आखिर उनका एन्टी रोमियो स्क्वाड फेल कैसे हो गया वो भी वाराणसी जैसे बडे शहर और बीएचयू जैसे प्रसिद्ध शिक्षण संस्थान में ?
जब एक बडे शहर और प्रसिद्ध शिक्षण संस्थान में भी लडकियों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं है तो गाँवों और छोटे शहरों में उनकी सुरक्षा के लिए क्या व्यवस्था होगी ?
हम यह नहीं कहते कि महिला सुरक्षा के मामलों में सरकार और पुलिस ने चूडिय़ां पहन रखी हैं लेकिन यदि छात्राओं को छेडखानी के विरोध में सडकों पर उतरना पडे तो यह सरकार की नाकामी, पुलिस प्रशासन की शिथिलता और एन्टी रोमियो स्क्वाड की असफलता सिद्ध करने के लिए काफी है।
महिला सुरक्षा
हर एक महिला की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी होनी चाहिए
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