आज 15 अगस्त है भारत की आजादी का दिन। 15 अगस्त 1947 के पहले भारत अंग्रेजों के आधीन था। अनगिनत जवानों, क्रान्तिकारियों और शहीदों के बलिदान के फलस्वरूप हमें अंग्रेजों से तो मुक्ति मिल गई । आज हम बडे फख्र से कहते हैं कि हम आजाद हैं । हम आजाद हैं का क्या मतलब है क्या हम अपने देश में अपनों घरों में आराम से रहते हैं , यही आजादी है ?
जबकि सच तो यह है हम अंग्रेजों से भले ही आजाद हो चुके हैं मगर अपनी पुरानी दकियानूसी सोच से आज भी बंधे हुए हैं। अगर कुछ पढे लिखे लोगों को छोड दिया जाए तो आज भी भारत में महिलाओं की स्थिति पहले से बहुत ज्यादा अच्छी नहीं है। यह हमारी पुरानी सोच का ही नतीजा है कि लडकियाँ आज भी बंदिशों में जकडी हुई हैं। न तो उन्हें पढने लिखने की आजादी है और न अपने लिए फैसले लेने की। दरअसल, महिलाएं आज मर्दों की गुलाम की तरह ही जीवन जी रही हैं।
आजादी का मतलब सिर्फ़ यह नहीं हमारी अपनी सरकार हमारा अपना घर है । आज भी महिलाओं से कहा जाता है कि शाम होने के बाद घर के बाहर मत जाना नहीं तो कुछ अनहोनी हो सकती है । जो लडकियाँ हिम्मत दिखाती हैं और नाइट शिफ्ट में काम पर निकलती भी हैं उनको न जाने कितने बुरे मर्दों की गन्दी भाषा के तीर सहने पडते हैं और कुछ के साथ तो दुष्कर्म जैसे घिनौनी घटनाएं तक हो जाती हैं। आप बताइए क्या आजादी सिर्फ़ दिन के लिए मिली है।
दूसरी बात , जब हम आजाद हैं हमारी अपनी सरकार है तो हमारी महिलाएं हमारे ही देश में सुरक्षित क्यों नहीं हैं ? जब देश में महिलाओं की सुरक्षा की व्यवस्था तक नहीं हो पा रही है तो कैसी आजादी ?
सिर्फ़ झण्डा फहरा देने की आजादी और राष्ट्रगान गाने की आजादी से हम अपने आपको आजाद नहीं कह सकते ।आजाद तो हम अपने आपको उस दिन समझेंगे जब हमारे देश की महिलाएं एक बजे रात को भी उतनी ही सुरक्षित महसूस करे जितना कि दिन में करती हैं। हम अपने आपको आजाद उस दिन समझेंगे जब महिलाओं को भी अपने हक और फैसले लेने की पूरी आजादी होगी। हम अपने आपको आजाद उस दिन समझेंगे जिस दिन बेटी पैदा होने के बाद भी बाप का सिर फख्र से उठा रहेगा और वह गर्व से कहेगा कि मेरे घर बिटिया हुई है ।
याद रखिए जिस देश के महिलाओं को आजादी नहीं है वह देश आजाद नही कहा जा सकता ।
महिला सुरक्षा
हर एक महिला की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी होनी चाहिए
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