महिला सुरक्षा

हर एक महिला की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी होनी चाहिए

मेरी मां



आंखें मूँद के जिस पर है ऐतबार,
वो मेरी माँ है
जिसकी गोद में बडा हुआ हूँ
जिसके सहारे खडा हुआ हूँ
मेरे जीवन का जो है आधार
वो मेरी माँ है

वो दुनिया में गर न होती तो मैं न होता
वो रातों में गर न जगती तो मैं न सोता
मैं उसकी दुनिया हूँ
और मेरा पूरा संसार
वो मेरी माँ है

दिल जिसका सारी दुनिया में सबसे बडा है
खुद भूखी रहकर जिसने मेरा पेट भरा है
रोज करना चाहूँ ईश्वर से
पहले जिसका दीदार 
वो मेरी माँ है

आंखे मूँद के जिस पर है ऐतबार,
 वो मेरी माँ है
जिसकी गोद में बडा हुआ हूँ
जिसके सहारे खडा हुआ हूँ 
मेरे  जीवन का जो है आधार 
वो मेरी माँ है।

होली में औरतों से अश्लीलता न दिखाएं



होली का त्योहार बहुत ही खूबसूरत त्योहार है। यह त्योहार हमारे जीवन में रंगों के महत्व को दर्शाने के साथ साथ  सत्य की असत्य पर विजय की कहानी भी बताता है। होली का त्योहार अगर सादगी से मनाया जाए तो बहुत अच्छा लगता है लेकिन पिछले कुछ सालों से होली के त्योहार से सादगी गायब सी हो गई है। सादगी की जगह हुडदंगई और अश्लीलता ने लेना शुरू कर दिया है। आज माहौल यह हो गया है कि रंग लगाने के बहाने औरतों और लडकियों से बदतमीजी से पेश आया जाता है। अश्लील हरकतें की जाती हैं , उन्हें ऐसी ऐसी जगह पर छूकर रंग लगाया जाता है जहाँँ छूना एक स्त्री की गरिमा के खिलाफ होता है। ऐसी स्थिति में जब औरतें या लडकियां विरोध करती हैं तो कहा जाता है कि बुरा न मानो होली है। 
अजी होली है तो क्या हुआ मर्यादा की हर सीमा आप पार कर जाओगे। नियम तो यह होना चाहिए कि औरतों और लडकियां आपस में एक दूसरे को रंग लगाएं और मर्द आपस में। यदि रंग लगाना ही है तो सिर्फ चेहरे में लगाया जाए न कि उन्हें अर्धनग्न करके अश्लीलता की जाए। हम नहीं कहते हैं कि हर इंसान इस तरह की हरकतें करता है पर कुछ अराजक लोग हैं जो किसी से बद्तमीजी करने के लिए होली जैसे पवित्र त्योहारों का इन्तजार करते रहते हैं।  इनका मन दूषित होता है ये होली का त्योहार नहीं मनाते बल्कि मौके का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं।

ऐसी गन्दी सोच वालों पर नजर रखने की जरूरत है और ऐसा सिर्फ समाज के बुद्धिजीवी लोगों की दखलअंदाजी के बाद ही सम्भव हो सकता है। साथ ही साथ हमारे समाज की औरतोंं और युवतियों को भी इस पर ध्यान देने की जरूरत है। उन्हें चाहिए कि अगर कोई शराबी , या अन्जान इंसान होली में रंग लगाने के बहाने उनसे अश्लीलता से पेश आता है तो वे उसका खुलकर विरोध करें और उनकी शिकायत करें। कोशिश यह भी होनी चाहिए कि शराबी पिए हुए, भांग खाए हुए लोगों के साथ होली ही न खेलें। 

ऐ समाज के लोगों अपनी आँखें खोलो

ऐ समाज के लोगों अपनी आँखें खोलो

बहुत रहे चुपचाप अरे अब तो कुछ बोलो

कब तक देखोगे जो अत्याचार हो रहा

मासूम बेटियों की इज्ज़त से जो

खिडवाड हो रहा

आज दरिन्दे किसी से भी नहीं डरते हैं

बेखौफ जो दिल में आया बस 

वही करते हैं

कोई रोक नहीं कोई टोक नहीं है

अब इन पर

ये हर लडकी को सडकों पे सताया करते हैं

बद्सलूकी और दुष्कर्म से जब 

दिल नहीं भरता इनका

तो पेट्रोल छिडककर मासूमों को जलाया करते हैं

सरकार और कानून भरोसे रह जाओगे

तो अपनी बच्चियों को कभी बचा ना पाओगे

अगर बचानी है अपनी इज्ज़त तो जागो

बन सुरक्षा कवच बेटियों के संग हो लो

ऐ समाज के लोगों अपनी आँखें खोलो

बहुत रहे चुपचाप अरे अब तो कुछ बोलो

छात्राओं में शोहदों का बढता खौफ

हम भले ही कहते हैं कि हमारा समाज शिक्षित हो रहा है मगर सच तो यह है कि पिछले कुछ समय में कुछ दबंगों के साथ साथ शिक्षित परिवार के  लडकों की भी मानसिकता बहुत गन्दी हो चुकी है जिसका आलम यह है कि लडकियाँ और महिलाएं अपने आपको और भी ज्यादा असुरक्षित महसूस कर रही हैं। आम भाषा में जिन्हें हम 'शोहदों' के नाम से जानते हैं जिनका काम सिर्फ लडकियों पर बुरी नजर रखना और उन पर गन्दे गन्दे कमेंट करना होता है, इन लोगों ने इस हद तक लडकियों को परेशान कर रखा है कि इनके डर से वे कालेज तक छोड दे रही हैं। आज अखबार में पढा कि उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में एक छात्रा एक शोहदे से इतनी आजिज आ चुकी है कि उसने कालेज जाना ही छोड दिया।इसके बाद उस शोहदे की हिम्मत तो देखिए वह छात्रा के घर पहुंच गया और उससे छेडखानी की और घर वालों के साथ भी गाली गलौज की।

यह बात सिर्फ प्रतापगढ़ जिले की ही नहीं है बल्कि न जाने कितने जिले कितने कालेजों की लडकियां इन शोहदों की हरकतों से परेशान हैं। कालेज की छुट्टी नहीं होती कि गेट पर शोहदों की लाइन लग जाती है। कुछ लडकियां तो बुरे और गन्दे कमेंट्स सुनने की आदत बना लेती हैं और कुछ डर के मारे कालेज छोडकर घर बैठ जाती हैं।आखिर कब तक चलेगा यह सब ? कब तक हमारी सरकार और कानून सोता रहेगा। आजकल तो आलम यह है कि महिलाओं और लडकियों की सुरक्षा के पुख्ता इन्तजाम की तो बात ही छोडिये अगर कोई लडकी किसी शोहदे के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराना चाहती है तो लिखी नही जाती क्योंकि ये शोहदे भी किसी न किसी बडे घराने या पावरफुल इंसान से सम्बन्धित होते हैं ,यदि किसी दबाव में एफआईआर लिख भी ली गई तो रिश्वतखोरी,सिफारिश और राजनीतिक दबाव की वजह से कोई कार्यवाही नहीं हो पाती है। शायद यही वजह है कि शोहदों की हिम्मत और लडकियों की आफत  दिनों दिन बढती जा रही है।

यदि इसी तरह से माहौल बिगडता रहा तो वो दिन दूर नहीं जब लडकियां कालेज जाना ही छोड देंगी।हम भारत सरकार से अपील करते हैं कि लडकियों के साथ हो रही इस तरह की बदतमीजी और  छेडखानी पर रोक लगाए और कालेज की छात्राओं की सुरक्षा के पूरे इन्तजाम करे। साथ ही साथ हम आम नागरिकों से भी अनुरोध करते हैं कि यदि आपके सामने कोई शोहदा किसी लडकी या महिला पर गन्दे कमेंट करता है या कोई बदतमीजी करता है तो खामोश न रहें बल्कि इसका विरोध करें। ये तो कतई न सोचें कि वो पता नहीं किसके घर की लडकी  है हम क्यों विरोध करें।याद रखिए यदि आज किसी जगह किसी दूसरे की बेटी बहन के साथ छेडखानी होते देखते हुए आप चुप रहे तो हो सकता है कि उसी जगह कल आपकी बेटी या बहन होगी तो उसके साथ भी इसी तरह की घटना हो सकती है। इसलिए चुप न रहें बल्कि आवाज उठाएं और अपनी बच्चियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करें।

महिला सुरक्षा से समझौता और नहीं

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