महिला सुरक्षा
होली में औरतों से अश्लीलता न दिखाएं
ऐ समाज के लोगों अपनी आँखें खोलो
ऐ समाज के लोगों अपनी आँखें खोलो
बहुत रहे चुपचाप अरे अब तो कुछ बोलो
कब तक देखोगे जो अत्याचार हो रहा
मासूम बेटियों की इज्ज़त से जो
खिडवाड हो रहा
आज दरिन्दे किसी से भी नहीं डरते हैं
बेखौफ जो दिल में आया बस
वही करते हैं
कोई रोक नहीं कोई टोक नहीं है
अब इन पर
ये हर लडकी को सडकों पे सताया करते हैं
बद्सलूकी और दुष्कर्म से जब
दिल नहीं भरता इनका
तो पेट्रोल छिडककर मासूमों को जलाया करते हैं
सरकार और कानून भरोसे रह जाओगे
तो अपनी बच्चियों को कभी बचा ना पाओगे
अगर बचानी है अपनी इज्ज़त तो जागो
बन सुरक्षा कवच बेटियों के संग हो लो
ऐ समाज के लोगों अपनी आँखें खोलो
बहुत रहे चुपचाप अरे अब तो कुछ बोलो
छात्राओं में शोहदों का बढता खौफ
हम भले ही कहते हैं कि हमारा समाज शिक्षित हो रहा है मगर सच तो यह है कि पिछले कुछ समय में कुछ दबंगों के साथ साथ शिक्षित परिवार के लडकों की भी मानसिकता बहुत गन्दी हो चुकी है जिसका आलम यह है कि लडकियाँ और महिलाएं अपने आपको और भी ज्यादा असुरक्षित महसूस कर रही हैं। आम भाषा में जिन्हें हम 'शोहदों' के नाम से जानते हैं जिनका काम सिर्फ लडकियों पर बुरी नजर रखना और उन पर गन्दे गन्दे कमेंट करना होता है, इन लोगों ने इस हद तक लडकियों को परेशान कर रखा है कि इनके डर से वे कालेज तक छोड दे रही हैं। आज अखबार में पढा कि उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में एक छात्रा एक शोहदे से इतनी आजिज आ चुकी है कि उसने कालेज जाना ही छोड दिया।इसके बाद उस शोहदे की हिम्मत तो देखिए वह छात्रा के घर पहुंच गया और उससे छेडखानी की और घर वालों के साथ भी गाली गलौज की।
यह बात सिर्फ प्रतापगढ़ जिले की ही नहीं है बल्कि न जाने कितने जिले कितने कालेजों की लडकियां इन शोहदों की हरकतों से परेशान हैं। कालेज की छुट्टी नहीं होती कि गेट पर शोहदों की लाइन लग जाती है। कुछ लडकियां तो बुरे और गन्दे कमेंट्स सुनने की आदत बना लेती हैं और कुछ डर के मारे कालेज छोडकर घर बैठ जाती हैं।आखिर कब तक चलेगा यह सब ? कब तक हमारी सरकार और कानून सोता रहेगा। आजकल तो आलम यह है कि महिलाओं और लडकियों की सुरक्षा के पुख्ता इन्तजाम की तो बात ही छोडिये अगर कोई लडकी किसी शोहदे के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराना चाहती है तो लिखी नही जाती क्योंकि ये शोहदे भी किसी न किसी बडे घराने या पावरफुल इंसान से सम्बन्धित होते हैं ,यदि किसी दबाव में एफआईआर लिख भी ली गई तो रिश्वतखोरी,सिफारिश और राजनीतिक दबाव की वजह से कोई कार्यवाही नहीं हो पाती है। शायद यही वजह है कि शोहदों की हिम्मत और लडकियों की आफत दिनों दिन बढती जा रही है।
यदि इसी तरह से माहौल बिगडता रहा तो वो दिन दूर नहीं जब लडकियां कालेज जाना ही छोड देंगी।हम भारत सरकार से अपील करते हैं कि लडकियों के साथ हो रही इस तरह की बदतमीजी और छेडखानी पर रोक लगाए और कालेज की छात्राओं की सुरक्षा के पूरे इन्तजाम करे। साथ ही साथ हम आम नागरिकों से भी अनुरोध करते हैं कि यदि आपके सामने कोई शोहदा किसी लडकी या महिला पर गन्दे कमेंट करता है या कोई बदतमीजी करता है तो खामोश न रहें बल्कि इसका विरोध करें। ये तो कतई न सोचें कि वो पता नहीं किसके घर की लडकी है हम क्यों विरोध करें।याद रखिए यदि आज किसी जगह किसी दूसरे की बेटी बहन के साथ छेडखानी होते देखते हुए आप चुप रहे तो हो सकता है कि उसी जगह कल आपकी बेटी या बहन होगी तो उसके साथ भी इसी तरह की घटना हो सकती है। इसलिए चुप न रहें बल्कि आवाज उठाएं और अपनी बच्चियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करें।
चलो हम बीते हुए कल से बगावत करते हैं
जख्मों पे अपने मरहम की सजावट करते हैं
चलो हम बीते हुए कल से बगावत करते हैं
तोडकर खामोशियाँ हम अपने लबों की
सच बोलने की आज फिर हिमाकत करते हैं
चलो हम बीते हुए कल से बगावत करते हैं
करके बयां हर दास्तान-ए-जुल्म आइए
अंधे कानून से इंसाफ की चाहत करते हैं
चलो हम बीते हुए कल से बगावत करते हैं
घूंघट उठा के अपना आओ सरे बाजार
बेनकाब कुछ शरीफों की शराफत करते हैं
चलो हम बीते हुए कल से बगावत करते हैं
जख्मों पे अपने मरहम की सजावट करते हैं
चलो हम बीते हुए कल से बगावत करते हैं
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