जख्मों पे अपने मरहम की सजावट करते हैं
चलो हम बीते हुए कल से बगावत करते हैं
तोडकर खामोशियाँ हम अपने लबों की
सच बोलने की आज फिर हिमाकत करते हैं
चलो हम बीते हुए कल से बगावत करते हैं
करके बयां हर दास्तान-ए-जुल्म आइए
अंधे कानून से इंसाफ की चाहत करते हैं
चलो हम बीते हुए कल से बगावत करते हैं
घूंघट उठा के अपना आओ सरे बाजार
बेनकाब कुछ शरीफों की शराफत करते हैं
चलो हम बीते हुए कल से बगावत करते हैं
जख्मों पे अपने मरहम की सजावट करते हैं
चलो हम बीते हुए कल से बगावत करते हैं
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