महिला सुरक्षा

हर एक महिला की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी होनी चाहिए

सुनों भारत की बेटियों



चुप मत रहना अब मत डरना
बेटी विरोधी समाजों से
टकराना बनकर तुम पत्थर 
झूठे रीति रिवाजों से
नारी हो तुम शान हो जग की
इस दुनिया पर बोझ नहीं
नारी हो तो गर्व करो तुम
मन में कोई अफसोस नहीं
सब कुछ कर सकती हो तुम
मन में अपने बस ठान तो लो
हर एक लक्ष्य तुम भेदोगी
विश्वास धनुष अरे तान तो लो
बनकर बिजली हर इक बाधा
चलो अपने दम पर पार करो
हिमा दास बनकर दुनिया में
भारत माँ की जयकार करो
अपनी किस्मत सुनो हे बेटियों
लिख लो खुद अपने हाथों से
चुप मत रहना अब मत डरना
बेटी विरोधी समाजों से
टकराना बनकर तुम पत्थर
झूठे रीति रिवाजों से।।।।



Photo source: internet

जानकारी जरूरी है

लडकियों को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए जिससे वे किसी भी अनचाही दिक्कत से बच सके और शोहदों से खुद सुरक्षित कर सके। धीना पुलिस अधीक्षक चन्दौली द्वारा बताई गई इन बातों पर गौर करें और इन्हें अपनाकर अपनी और अपने परिवार की इज्ज़त को सलामत रखें।
वीडियो देखने के लिए क्लिक करें...

https://youtu.be/bD7Z9I2URy8

मेरी मां



आंखें मूँद के जिस पर है ऐतबार,
वो मेरी माँ है
जिसकी गोद में बडा हुआ हूँ
जिसके सहारे खडा हुआ हूँ
मेरे जीवन का जो है आधार
वो मेरी माँ है

वो दुनिया में गर न होती तो मैं न होता
वो रातों में गर न जगती तो मैं न सोता
मैं उसकी दुनिया हूँ
और मेरा पूरा संसार
वो मेरी माँ है

दिल जिसका सारी दुनिया में सबसे बडा है
खुद भूखी रहकर जिसने मेरा पेट भरा है
रोज करना चाहूँ ईश्वर से
पहले जिसका दीदार 
वो मेरी माँ है

आंखे मूँद के जिस पर है ऐतबार,
 वो मेरी माँ है
जिसकी गोद में बडा हुआ हूँ
जिसके सहारे खडा हुआ हूँ 
मेरे  जीवन का जो है आधार 
वो मेरी माँ है।

होली में औरतों से अश्लीलता न दिखाएं



होली का त्योहार बहुत ही खूबसूरत त्योहार है। यह त्योहार हमारे जीवन में रंगों के महत्व को दर्शाने के साथ साथ  सत्य की असत्य पर विजय की कहानी भी बताता है। होली का त्योहार अगर सादगी से मनाया जाए तो बहुत अच्छा लगता है लेकिन पिछले कुछ सालों से होली के त्योहार से सादगी गायब सी हो गई है। सादगी की जगह हुडदंगई और अश्लीलता ने लेना शुरू कर दिया है। आज माहौल यह हो गया है कि रंग लगाने के बहाने औरतों और लडकियों से बदतमीजी से पेश आया जाता है। अश्लील हरकतें की जाती हैं , उन्हें ऐसी ऐसी जगह पर छूकर रंग लगाया जाता है जहाँँ छूना एक स्त्री की गरिमा के खिलाफ होता है। ऐसी स्थिति में जब औरतें या लडकियां विरोध करती हैं तो कहा जाता है कि बुरा न मानो होली है। 
अजी होली है तो क्या हुआ मर्यादा की हर सीमा आप पार कर जाओगे। नियम तो यह होना चाहिए कि औरतों और लडकियां आपस में एक दूसरे को रंग लगाएं और मर्द आपस में। यदि रंग लगाना ही है तो सिर्फ चेहरे में लगाया जाए न कि उन्हें अर्धनग्न करके अश्लीलता की जाए। हम नहीं कहते हैं कि हर इंसान इस तरह की हरकतें करता है पर कुछ अराजक लोग हैं जो किसी से बद्तमीजी करने के लिए होली जैसे पवित्र त्योहारों का इन्तजार करते रहते हैं।  इनका मन दूषित होता है ये होली का त्योहार नहीं मनाते बल्कि मौके का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं।

ऐसी गन्दी सोच वालों पर नजर रखने की जरूरत है और ऐसा सिर्फ समाज के बुद्धिजीवी लोगों की दखलअंदाजी के बाद ही सम्भव हो सकता है। साथ ही साथ हमारे समाज की औरतोंं और युवतियों को भी इस पर ध्यान देने की जरूरत है। उन्हें चाहिए कि अगर कोई शराबी , या अन्जान इंसान होली में रंग लगाने के बहाने उनसे अश्लीलता से पेश आता है तो वे उसका खुलकर विरोध करें और उनकी शिकायत करें। कोशिश यह भी होनी चाहिए कि शराबी पिए हुए, भांग खाए हुए लोगों के साथ होली ही न खेलें। 

महिला सुरक्षा से समझौता और नहीं

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