महिला सुरक्षा

हर एक महिला की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी होनी चाहिए

सावधानी जरूरी है

मामला है लखनऊ के सरोजिनी नगर में, 9 दिसंबर शनिवार की रात का , लगभग साढे आठ बजे एक लडकी कुछ सामान खरीदने के लिए बाहर गई हुई थी। वह सामान खरीदकर लौट ही रही थी कि उसके जान पहचान के एक युवक ने उसे घर तक छोडने की बात की। चूंकि युवक युवती की जान पहचान का था इसलिए युवती ने उस पर विश्वास कर लिया और उसके साथ चल दी। शायद युवती को अन्दाजा भी नहीं था कि उसने थोडी सी जान पहचान के आधार पर उस पर विश्वास करके बहुत बडी गलती कर दी है। युवक उसको घर ले जाने के बजाय एक सुनसान जगह पर ले गया और अपने दोस्त को भी बुला लिया। दोनों दोस्तों ने मिलकर उस युवती की इज्ज़त लूट ली और बाद में सडक किनारे फेंककर भाग निकले। युवती काफी देर तक मदद के लिए किसी के आने का इन्तजार करती रही। काफी देर के बाद एक इंसान पहुंचा और जब युवती ने उससे मदद मांगी तो उस इंसान ने मदद करने के बजाय फिर से उसके साथ रेप किया। खैर, बाद में पहुंचे कुछ और लोगों ने किसी तरह युवती को घर तक पहुँचाया और पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज करवाई।

अब इसके आगे पुलिस क्या करती है क्या नहीं ये बाद की बात है लेकिन यह कोई नई घटना नही है। ऐसा पहले भी कई घटनाओं में हो चुका है जब किसी जान पहचान वाले ने ही दुष्कर्म किया है। आखिर हम और हमारे देश की युवतियां इन घटनाओं से कब सबक सीखेंगे और कब सावधानी बरतेंगे ?

घटना हो जाने के बाद हम सारा दोष सरकार , पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था को देते हैं क्या हमारा फर्ज नहीं बनता कि हम भी थोडी सावधानी बरतें, अपनी सुरक्षा को लेकर सजग रहें, अपनी आँख और कान खुला रखें ?

हम बार बार देश की युवतियों से यही अपील करते हैं कि अपने घर के सदस्यों के अलावा किसी पर भी पूरी तरह विश्वास न करें खासकर रात के समय और यदि मजबूरी में किसी कम जान पहचान वाले के साथ जाना पडे तो कम से कम अपने घर वालों को इन्फार्म कर दें और सख्स का नाम बता दें जिसके साथ आप हैं तथा साथ ही साथ उस सख्स की हर हरकत पर ध्यान दें , यदि उसकी नीयत पर जरा सा भी संदेह हो तो तुरन्त उस सख्स को पता चले बिना पुलिस या महिला हेल्पलाइन पर इन्फार्म करें।

(महिला सुरक्षा से सम्बंधित हर हेल्पलाइन नंबर आप हमारी वेबसाइट से नोट कर सकते हैं। )


हम हर परिवार को यह सलाह देना चाहते हैं कि अपने घर की लडकियों को मजबूत बनाएं, उन्हें सावधान करें कि वो किसी पर भी आँख बन्द करके विश्वास न करें भले ही वह आपका विश्वसनीय पडोसी या रिश्तेदार हो। इस वक्त माहौल इतना खराब है कि जिसको मदद के लिए पुकारो वही फायदा उठा लेना चाहता है।

इसलिए आप सबसे गुजारिश है कि खुद को और अपनों को इतना सावधान रखिए कि घटनाएं कम से कम हों।

याद रखिये, वो घटनाएं जो थोडी सी सावधानी से टाली जा सकती थीं जब घटित होती हैं तो बडी तकलीफ होती है ।

सावधान रहिए, सुरक्षित रहिए।

बेटियां

हीरे हैं बेटे गर तो मोती हैं बेटियां

हर इक घर की लक्ष्मी होती हैं बेटियां


रिश्ते तोडना तो अक्सर आदत है बेटों की

हर रिश्ते को इक धागे में पिरोती हैं बेटियां


परिवार में सबकी फिकर रहती है इनको

सबको सुला के आखिर में सोती हैं बेटियां


इक ओर बडे होकर माँ बाप को रुलाते हैं बेटे

तो माँ बाप के लिए जीवन भर रोती हैं बेटियां





हीरे हैं बेटे गर तो मोती हैं बेटियां


हर इक घर की लक्ष्मी होती हैं बेटियां

बेचारी बेटियां

जन्म हुआ बेटी का
जैसे मरन हुआ है किसी का
ऐसा आलम है घर मे
मुँह लटका है सभी का
थोडी बडी हुयी बेटी
चिँता लगी सताने
कैसे होगा ब्याह सोचकर
सिर लगा बाप खुजलाने
कोस रहा है माँ को क्यो बेटी जन्मी तूने
कहाँ से आयेगा दहेज
हर चीज के दाम हुए दूने
जैसे तैसे ब्याह हुआ
और गयी बेटी ससुराल
सुनकर ताने सास ननद के
हुआ बुरा फिर हाल
सास कहे आराम न कर तू
काम करा कर तेज
ननद कहे कि आखिर तू
कम क्योँ लायी दहेज
बीता समय हुयी गर्भवती जब
फिर से यही दबाव कि
कुछ भी करना बेटी न जन्मना
बेटा होगा तो होगा रोशन घर का नाम
बेटी आयी तो बिगडेगा बनता सारा काम
आखिर हुआ जनम फिर बेटी का
सभी हुये हलकान
सिर पे रख के हाथ आज फिर
है पूरा घर परेशान

माँ रोये दिन रात सोचकर
सिर्फ एक ही बात
होगा वही फिर बेटी सँग जो हुआ था मेरे साथ
आखिर कब बदलेगी सोच जमाने की
कब होगी कम लालसा बेटा पाने की

कब तक कोसी जायेँगी ये प्यारी बेटियाँ
बेचारी बेटियाँ ।

बलात्कारियों को फाँसी दो

दुनिया में शायद ही कोई ऐसा परिवार होगा जिस परिवार में बेटियां नही हो और हर परिवार अपने घर की बेटी की सुरक्षा को लेकर गम्भीर रहता है। हर बेटी का बाप चाहता है कि उसकी हमेशा सुरक्षित रहे,और हर बहन का भाई चाहता है कि उसकी बहन सडकों पर ,कालेज में सुरक्षित महसूस करे। पर यह होगा कैसे ? क्या सिर्फ सरकार के सुरक्षा इन्तजाम काफी हैं इसके लिए ? जी नहीं, दरअसल जब तक हर मर्द के मन में लडकियों के लिए सम्मान की भावना विकसित नहीं होगी कोई भी नियम और सरकारी कानून हमारी बहन , बेटियों को सुरक्षित नही कर सकता।
महिलाओं में इस बलात्कार रूपी राक्षस का डर इस कदर भर गया है कि कोई भी महिला अकेले कहीं आने जाने से पहले चार बार सोचती है।हमारे देश की बेटी आज सडकों पर उतर कर न्याय मांग रही है, हमारे देश की बहनें आज पोस्टर लेकर महिलाओं साथ हो रहे बलात्कार के विरोध में प्रदर्शन कर रही हैं। यह सारी चीजें दर्शाती हैं कि हमारे देश हमारी दुनिया में महिलाएं कितनी असुरक्षित हैं।
सडकों , बाजारों की बात ही छोड दीजिए लडकियाँ कहीं पर भी सुरक्षित नही हैं।आज समाज इतना अधिक दूषित हो चुका है कि सगे रिश्ते भी कलंकित होते जा रहे हैं। समाचार पत्रों में अक्सर पढने को मिलता है कि शराबी बाप ने बेटी की इज्ज़त तार तार की या चचेरे भाई ने ही बहन का यौन शोषण किया । बदलते समय के साथ लोगों की सोच गन्दी होती जा रही है। हम अक्सर बाजारों में देखते हैं कि अधेड मर्द जिसकी खुद की भी जवान बेटी होती है ,जब किसी दूसरे घर की लडकियों को देखता है तो कहता है वाह क्या मस्त आइटम है।यह सब किसकी देन है ? मोबाइल, इंटरनेट या जिसकी भी देन हो लेकिन आने वाले समय में हालात और भी बदतर होने वाले हैं। अगर ऐसा ही चलता रहा तो एक दिन सडकों पर सिर्फ मर्द ही नजर आएंगे।
अभी भी वक्त है हालात सुधारे जा सकते हैं । हमारी लोगों से अपील है कि यदि आप सब कहीं पर भी किसी लडकी के साथ हो रही बदतमीजी या छेडखानी को देखें तो कृपया नजरअंदाज न करें। यह ना सोचें कि यह लडकी हमारे घर की नहीं है तो हम क्यों मदद करें। याद रखिए आज यदि किसी और की बेटी है तो कल उसी जगह पर आपकी बेटी या बहन भी हो सकती है।
फिर भी यदि आप अपने आपको कमजोर समझते हैं , लडकियों पर होते अत्याचार को देखते हुए भी आप में कुछ करने की हिम्मत नहीं है तो कम से कम पुलिस को इन्फार्म जरूर कर दें। अगर इतना भी आपसे ना हो पाए तो कृपया कम से कम बलात्कार के विरोध में प्रदर्शन करती लडकियों का साथ जरूर दे ,उनके साथ जरूर खडे हों। आपको देखकर उनका हौसला तो बढेगा।
अब सिर्फ एक ही नारा होना चाहिए..
ना इज्ज़त ना शाबाशी दो
बलात्कारियों को फाँसी दो।

महिला सुरक्षा से समझौता और नहीं

  गलत नियत वालों को मौका और नहीं अब और नहीं महिला सुरक्षा से समझौता और नहीं अब और नहीं जागो हे भारत की बेटियों अब तो नींद से जागो तुम अपनी स...

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