महिला सुरक्षा

हर एक महिला की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी होनी चाहिए
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बाबाओं से बच के रहना रे बाबा

भारत में बाबाओं, साधुओं और सन्तों की कमी नहीं है लेकिन कुछ दुष्ट और ढोंगी भोगी बाबाओं ने सच्चे साधुओं को भी बदनाम कर दिया है। पहले का जमाना था कि लोग मोह माया , काम इच्छाओं को त्यागकर साधू सन्यासी बनते थे लेकिन अब तो लोग सुख भोगने के लिये, अपनी कामेच्छा पूरी करने के लिये , धन दौलत इकठ्ठी करने के लिए साधू बाबा बनते हैं। साधू सन्यासी का मतलब होता है धन दौलत और सांसारिक सुखों से अलग होकर सिर्फ ईश्वर की सेवा करना ,मगर आज सबसे ज्यादा पैसा और सुख किसी के पास है तो वे आजकल के साधू सन्त ही हैं। साधू सन्तों का काम होता है दुनिया में ज्ञान बाँटना और शान्ति कायम रखना लेकिन आजकल बाबाओं और उनके समर्थकों ने सबसे ज्यादा बवाल मचा के रखा है। किसी आम इंसान ने अगर इन बाबाओं के खिलाफ मुँह खोला तो ये बाबा और उनके समर्थक उस आम इंसान की हत्या करवा देते हैं । भाई ये तो सीधा सीधा गुंडागर्दी है कि हम जो कर रहे हैं हमें करने दो वरना जान से हाथ धोना पडेगा। दरअसल, ये गुंडे ही हैं जिन्होंने कानून से बचने के लिए साधू बाबा का चोला ओढ रखा है।
अब आप बताइए कि साधू सन्त का काम तो दुनिया भर में शान्ति कायम करना, अहिंसा का प्रचार करना और सबको जीवों पर दया करना सिखाना है मगर आजकल के साधू तो बात बात पर हिंसा और उपद्रव पर उतारू हो जाते हैं, ये काहे के साधू हैं।
साधू सन्त अपने ज्ञान से दुनिया को बचाने का कार्य करते हैं पर यहाँ तो साधुओं और बाबाओं को अपनी ही जान की चिन्ता रहती है इसलिए बडी बडी गाडियां भर के हथियार बन्द सुरक्षाकर्मियों के साथ आते जाते हैं , ये साधू हैं या नेता ?
मेरे देश की भोली भाली जनता अरे अब तो जाग जाओ।आशाराम बापू, बाबा रामपाल, बाबा राम रहीम और न जाने कितने मौलवी और पादरी बलात्कार के गुनाह में गिरफ्तार हो चुके हैं और अब भी न जाने कितने आश्रमों में बहू बेटियों की इज्ज़त से खिलवाड़ हो रहा होगा पर सच को सामने लाने की किसी में हिम्मत नहीं है। इसलिए अंधविश्वासों को त्यागो और आँखों को खोलकर चलो तथा अपनी माताओं, बहनों और बेटियों को इन काम के भूखे भेडियों से बचाओ।
याद रखिए साधू सन्त वही है जो साधू सन्त की परिभाषा पर खरा उतरता है। साधू वह होता है जो कुश और घास पर उठता बैठता या सोता हो , सोने चाँदी के सिंहासन पर बैठने वाला और मखमल के बिस्तर पर सोने वाला या तो व्यापारी होगा या तो भोगी।
सच्चे साधू सन्यासियों की किसी से दुश्मनी नहीं होती , वो तो ईश्वर के सानिध्य में रहते हैं उन्हें मृत्यु का कैसा डर। हजारों सुरक्षाकर्मियों और हथियार बन्द समर्थकों के साथ चलने वाला इंसान साधू या बाबा नहीं हो सकता वह या तो गुंडा होगा या नेता।

सच्चे साधू सन्त स्त्रियों के स्पर्श से दूर ही रहते हैं ताकि उनका ब्रम्हचर्य सलामत रहे और ताकि वे दुनिया को खुद पर नियंत्रण रखने के सम्बंध में प्रेरणा दे सकें। स्त्रियों सें पाँव दबवाने वाला, स्त्रियों के साथ रहने वाला या स्त्रियों से सेवा करवाने वाला या तो भोगी होगा या तो बलात्कारी।
ज्ञान लेना ही है तो ऐसे साधू बाबा से लीजिए जो आपको सिर्फ ज्ञान दे बदले में आपका धन और आपकी तथा आपकी बहन ,बेटी और बहू की इज्ज़त न मांगे।
अगर सिर्फ कुछ चौपाइयों को कहने और उनका अर्थ समझा देने भर से कोई साधू सन्यासी या बैरागी बन जाता तो यह तो हर पढा लिखा इंसान कर सकता है। साधू वह होता है जिसका चरित्र ऊँचा हो। चरित्रहीन इंसान को साधू या बाबा कहलाने का कोई हक नही है। साधू बनने की जो सबसे बडी कसौटी है वह है अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण रखना और अपने आपको काम, क्रोध, लोभ और मोह से दूर रखना , और इसमें से एक भी लक्षण आजकल के साधू बाबाओं में देखने को नहीं मिलते। अगर कुछ सच्चे साधू सन्त हैं भी तो उन तक आम इंसान पहुंच ही नहीं पाता क्योंकि बीच में ये ढोंगी , लोभी और कामी बाबा बडे बडे झूठे आडंबर और भौकाल दिखाकर रोक जो लेते हैं।
इसलिए आजकल के बाबाओं के ज्ञान को परखने के साथ साथ उनके चरित्र को भी परखना जरूरी हो गया है।

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