महिला सुरक्षा

हर एक महिला की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी होनी चाहिए

कोलकाता रेप केस अपडेट

 कोलकाता गैंगरेप के मामले में जिस तरह से राजनीति हो रही थी और केस को तोडा मरोडा जा रहा था उसे देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है।सुप्रीम कोर्ट ने मामले को स्वतः संज्ञान में लेते हुए अपने पास बुला लिया है। 

अभी तक पुलिस ने महज एक इंसान संजय राय को गिरफ्तार किया है और उसने कुबूल भी किया है कि उसने अपराध किया है लेकिन जब जांच के बाद महिला डाक्टर के शरीर में 151 mg सीमेन मिला और प्रूफ हुआ कि इतना सीमेन एक आदमी का नहीं हो सकता तो जाहिर सी बात है कि रेप करने वाले एक से अधिक थे। इसका साफ मतलब है कि संजय राय झूठ बोल रहा है कि उसने यह अपराध अकेले किया है। इतना तो साफ है कि अपराधी बहुत पावरफुल है और शायद उसी के कहने पर संजय राय ने सारा इल्जाम अपने ऊपर ले लिया है। संजय झूठ बोल रहा है कि सच इसी को सामने लाने के लिए अब सीबीआई उसका लाई डिटेक्टर टेस्ट करने की तैयारी में है। अब जब सुप्रीम कोर्ट ने मामने को अपने अंडर में ले लिया है तो उम्मीद है कि मृत डाक्टर और उसके परिवार को इंसाफ जल्द से जल्द मिलेगा और अपराधी को सख्त से सख्त सजा मिलेगी।

महिला दिवस की बधाइयां



नारी और पुरूष इस संसार रूपी गाडी के दो पहिए के समान है । यदि संसार की इस गाडी के दोनों पहियों में से किसी एक को भी अलग कर दिया जाए तो संसार की कल्पना नहीं की जा सकती है। ऐसे में जरूरी है कि नारी और पुरूष दोनों को एकसमान हक और अधिकार मिले। अक्सर हमारे प्राचीन भारतीय समाज में देखा गया है कि पुरुषों को नारियों की तुलना में ज्यादा अधिकार और सम्मान मिले हैं लेकिन जैसे जैसे समाज आगे बढा है नारियों की दशा में सुधार हुए हैं । यदि कुछ मामलों को छोड दिया जाए तो आज के आधुनिक समाज में नारियां पुरूषों से किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है और ऐसा होना भी चाहिए।
आज अन्र्तराष्ट्रीय महिला दिवस है तो हम सब को चाहिए कि नारियों के सम्मान में कुछ न कुछ करने की पहल करें। यदि कुछ भी नहीं कर सकते तो कम से कम दूसरों के घरों की महिलाओं की इज्ज़त उसी तरह से करें जैसी अपने घर की महिलाओं की करते हैं। महिलाएं आगे बढ रही हैं लेकिन उन्हें समाज के प्रोत्साहन की जरूरत है हमारे सपोर्ट की जरूरत है जिससे उनका कभी हौसला न टूटे। तो आइए आज हम प्रण करते हैं कि किसी भी महिला के साथ कभी भी कोई दुर्व्यवहार नहीं करेंगे और न होने देंगे। उन्हें पूरी इज्ज़त देंगे और पूरा सम्मान करेंगे।

अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर बधाइयां।

देर सही पर इंसाफ हुआ


निर्भया कांड मामले में देर से ही सही लेकिन इंसाफ मिल चुका है। दिल्ली की अदालत ने चारों आरोपियों को 22 जनवरी 2020 को सुबह सात बजे फाँसी पर लटकाने का आदेश जारी किया है। अदालत के इस फैसले से लोगों का अदालत और कानून पर थोडा विश्वास मजबूत होगा और उन मानसिक विकृति के लोगों में थोडा सा खौफ भी पैदा होगा जो लडकियों और छोटी बच्चियों पर हवस भरी गन्दी निगाह रखते हैं। 
आपको बता दें कि दिसंबर 2012 में एक 23 वर्षीय पैरामेडिकल छात्रा से 6 लोगों ने हैवानियत की हदें पार करते हुए सामूहिक दुष्कर्म करके उसे बुरी तरह घायल करके मरणासन्न अवस्था में सडक के किनारे फेंक दिया था। सभी आरोपियों में से एक आरोपी राम सिंह जेल में ही आत्महत्या कर चुका है जबकि एक आरोपी नाबालिग था जिसे तीन साल की सजा सुनाई गई थी जिसकी सजा पूरी हो चुकी है और उसे दिसंबर 2015  में रिहा भी किया जा चुका है। अब बाकी बचे चारों आरोपियों का भी डेथ वारंट जारी कर दिया गया है। हालांकि अपराधियों के पास अभी भी उपचारात्मक याचिका दायर करने का विकल्प  खुला हुआ है।
देश भर में लगातार बढ रही दुष्कर्म की घटनाओं को देखते हुए इन चारों आरोपियों की फाँसी एक सबक साबित हो सकती है। आरोपियों को पता चलना चाहिए कि औरतों और मासूम बच्चियों पर अब किसी भी तरह का अत्याचार बर्दाश्त नहीं हो सकेगा और हर आरोपी चाहे वह बडे रसूख वाला हो या कम, उसे कडी से कडी सजा मिलेगी। हम निर्भया को तो वापस नहीं ला सकते पर इस  फाँसी से पीडिता के परिवार और देश की जनता को थोड़ी सी शान्ति और राहत जरूर महसूस होगी। 
हम देश की हर महिला और बच्ची के लिए सुरक्षित माहौल की कामना करते हैं।

Photo source:Dainik jagran

बलात्कार: अब तो हद हो चुकी


भारत में बेटियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अब मन में सवाल गहरे हो रहे हैं। बलात्कारियों का हौसला इस कदर बढ चुका है कि वो अपराध करने से बाज नहीं आ रहे हैं। पहले दुष्कर्म करने के बाद पीडिता को जिन्दा छोड देते थे इसलिए कम से कम वो इंसाफ के लिए कानून का दरवाजा तो खटखटा सकती थी लेकिन अब तो हैवानियत इतनी बढ चुकी है कि बलात्कार तो करते ही हैं पीडिता को जला कर मार दे रहे हैं ताकि कोई सबूत न बचे। यह अपराध अब हत्या के अपराध से भी ज्यादा जघन्य और हैवानियत भरा हो चुका है। ये राक्षसी प्रवृत्ति के लोग आखिर कहां से आ गए हैं जो बेटियों को अपनी हवस का शिकार बना कर उनकी जिन्दगी छीन रहे हैं। 
सबसे बडी तकलीफ तब होती है जब पीडिता के पक्ष को कानून सुनना ही नहीं चाहता है। हर बार लगभग ऐसा ही होता है कि कोई बाप या भाई किसी लडकी के गुमशुदा होने की रिपोर्ट दर्ज कराने जाता है तो पुलिस आनाकानी करती है और तरह तरह के तर्क देती है कि वह किसी के साथ भाग गई होगी .. आ जाएगी वगैरह वगैरह। अबे तेरे पास कोई मदद के लिए गया है तो उसकी मदद कर , रिपोर्ट दर्ज कर और तुरंत कार्यवाही कर , हो सकता किसी मासूम की जिन्दगी बच जाए। पुलिस की कामचोरी और घूसखोरी किसी से छुपी नहीं है। कई मामलों में तो ऐसा भी देखने को मिलता है कि पीडिता के पहुँचने से पहले अपराधी ही थाने पहुँचकर नोटों के बण्डल पकडा देता है तो पुलिस अपने आप अंधी और बहरी हो जाती है न उसे कुछ सुनाई देता है न कुछ दिखाई देता है। 

हम सरकार से यही गुजारिश करना चाहते हैं कि पुलिस को यह आदेश हो कि लडकियों व औरतों के मामले में मामला  किसी भी क्षेत्र का हो और कैसा भी हो तुरंत एफआईआर दर्ज हो और त्वरित कार्यवाही शुरू हो। जैसा कि हैदराबाद वाले केस में हुआ कि पुलिस ने रिपोर्ट इसलिए दर्ज नहीं की क्योंकि मामला उनके क्षेत्र में नहीं आता है। अब यह बहानेबाजी बन्द होनी चाहिए और व्यवस्था ऐसी हो कि औरतों और बच्चियों के सम्बंध में जो भी नजदीकी पुलिस चौकी या थाना हो वहां पर बिना किसी सवाल के रिपोर्ट दर्ज हो और तुरंत एक्शन लिया जाए। पुलिस की थोडी सी सतर्कता किसी मासूम की जिन्दगी बचा सकती है।

महिला सुरक्षा से समझौता और नहीं

  गलत नियत वालों को मौका और नहीं अब और नहीं महिला सुरक्षा से समझौता और नहीं अब और नहीं जागो हे भारत की बेटियों अब तो नींद से जागो तुम अपनी स...

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