महिला सुरक्षा

हर एक महिला की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी होनी चाहिए

मुस्लिम महिलाओं का सम्मान

मुस्लिम महिलाओं के हक और सम्मान की सुरक्षा को देखते हुए कैबिनेट ने विधेयक "मुस्लिम वूमेन प्रोटेक्शन आफ राइट्स आन मैरिज " को हरी झंडी दे दी है। इस विधेयक का उद्देश्य उन मुस्लिम मर्दों को सबक सिखाना है जो छोटी छोटी बात पर अपनी पत्नी तलाक देने की धमकी देते हैं या तलाक दे देते हैं। इस कानून की रूपरेखा तैयार करने के लिए गृहमंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में मंत्रिमंडलीय कमेटी का गठन किया गया था।

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बयान दिया है कि ," प्रस्तावित कानून मुस्लिम समाज की महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के लिए है। कई राज्यों ने इस विधेयक का समर्थन किया है उम्मीद है कि यह इसी सत्र में पारित भी हो जाएगा।"

तीन तलाक अर्थात तलाक-ए-बिद्दत को कोर्ट ने पहले ही असंवैधानिक करार दिया है।यह उपरोक्त विधेयक पर आधारित कानून सिर्फ तीन तलाक के मामलों में ही क्रियाशील होगा तथा जम्मू एवं कश्मीर को छोडकर देश के हर राज्य में लागू होगा।

इस कानून का उल्लंघन करने वाले मर्दों को तीन साल तक की कैद और साथ ही साथ जुर्माने का भी प्रावधान है। इसके अलावा तलाक-ए-बिद्दत से पीडित महिलाओं को गुजारा भत्ता और नाबालिग बच्चों की कस्टडी लेने का अधिकार होगा।यह कानून बन जाने के बाद तीन तलाक का अपराध एक संगीन और गैर जमानती अपराध की श्रेणी में रखा जाएगा।

वास्तव में यह कानून उन मर्दों के मुँह पर तमाचा होगा जो अपनी पत्नी को खिलौना समझते हैं और तीन तलाक की आड में पुरानी पत्नी से छुटकारा पाकर नई शादी कर लेते हैं। इस कानून की एक और खास बात होगी कि तीन तलाक चाहे लिखित में , मौखिक में या किसी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम जैसे इंटरनेट, सोशल मीडिया से बोला गया हो सब एकसमान संगीन अपराध माने जाएंगे।

अन्य राजनीतिक दल भले ही इस कानून का किसी न किसी रूप में विरोध करें लेकिन सच यह हैं कि मुस्लिम महिलाओं को इस तरह के कानून की बहुत जरूरत है ।


इनको रिएक्शन चाहिए

भारतीय जनता पार्टी एक तरफ तो महिलाओं के सम्मान और हक की बातें करती है वहीं दूसरी तरफ इनके नेताओं की जुबान बेलगाम होती जा रही है।

मध्य प्रदेश के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार सिंह चौहान ने एक बार फिर से महिलाओं के सम्बंध में गलत बयानबाजी करके उनका अपमान किया है।

उन्होंने बयान दिया है कि उनके सम्मेलन या रैलियों में आंगनबाड़ी महिला कार्यकर्ताओं की भीड न जमा की जाए क्योंकि वो रिएक्शन नहीं देती हैं।

अब बताइए जरा कि साहब को आंगनबाड़ी महिला कार्यकर्ताओं से किस तरह का रिएक्शन चाहिए ? क्या आंगनबाड़ी महिला कार्यकर्ता उनकी बातों पर तालियां नहीं बजाती ? अजी तालियां बजाने वाली कभी बातें तो कीजिए। हाँ ये हो सकता है कि साहब आंगनबाड़ी महिलाओं को इशारों में कुछ कहना चाहते हों और शरीफ इज्जतदार महिलाएं इनके इशारों को नजरअंदाज कर देती हों।

खैर, कुछ भी हो महिलाओं के खिलाफ इस तरह की बयानबाजी करना बेहद शर्मनाक है। इस तरह की बातें करना गैरजिम्मेदाराना और असभ्य है जो किसी भी तरह से बर्दाश्त करने लायक नहीं है। भारतीय जनता पार्टी के उच्च पदों पर बैठे नेताओं को इस बारे में सोचने की जरुरत है । देश इस वक्त आप में विश्वास दिखा रहा है अपने नेताओं की गलत जुबान और बयानबाजी के द्वारा उस विश्वास को तोडने की कोशिश मत कीजिए।

देश की महिलाएं रैलियों और सम्मेलनों में अच्छी बातें और योजनाएं सुनने आती आपको फ्लाइंग किस या रिएक्शन देने नहीं।

सावधानी जरूरी है

मामला है लखनऊ के सरोजिनी नगर में, 9 दिसंबर शनिवार की रात का , लगभग साढे आठ बजे एक लडकी कुछ सामान खरीदने के लिए बाहर गई हुई थी। वह सामान खरीदकर लौट ही रही थी कि उसके जान पहचान के एक युवक ने उसे घर तक छोडने की बात की। चूंकि युवक युवती की जान पहचान का था इसलिए युवती ने उस पर विश्वास कर लिया और उसके साथ चल दी। शायद युवती को अन्दाजा भी नहीं था कि उसने थोडी सी जान पहचान के आधार पर उस पर विश्वास करके बहुत बडी गलती कर दी है। युवक उसको घर ले जाने के बजाय एक सुनसान जगह पर ले गया और अपने दोस्त को भी बुला लिया। दोनों दोस्तों ने मिलकर उस युवती की इज्ज़त लूट ली और बाद में सडक किनारे फेंककर भाग निकले। युवती काफी देर तक मदद के लिए किसी के आने का इन्तजार करती रही। काफी देर के बाद एक इंसान पहुंचा और जब युवती ने उससे मदद मांगी तो उस इंसान ने मदद करने के बजाय फिर से उसके साथ रेप किया। खैर, बाद में पहुंचे कुछ और लोगों ने किसी तरह युवती को घर तक पहुँचाया और पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज करवाई।

अब इसके आगे पुलिस क्या करती है क्या नहीं ये बाद की बात है लेकिन यह कोई नई घटना नही है। ऐसा पहले भी कई घटनाओं में हो चुका है जब किसी जान पहचान वाले ने ही दुष्कर्म किया है। आखिर हम और हमारे देश की युवतियां इन घटनाओं से कब सबक सीखेंगे और कब सावधानी बरतेंगे ?

घटना हो जाने के बाद हम सारा दोष सरकार , पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था को देते हैं क्या हमारा फर्ज नहीं बनता कि हम भी थोडी सावधानी बरतें, अपनी सुरक्षा को लेकर सजग रहें, अपनी आँख और कान खुला रखें ?

हम बार बार देश की युवतियों से यही अपील करते हैं कि अपने घर के सदस्यों के अलावा किसी पर भी पूरी तरह विश्वास न करें खासकर रात के समय और यदि मजबूरी में किसी कम जान पहचान वाले के साथ जाना पडे तो कम से कम अपने घर वालों को इन्फार्म कर दें और सख्स का नाम बता दें जिसके साथ आप हैं तथा साथ ही साथ उस सख्स की हर हरकत पर ध्यान दें , यदि उसकी नीयत पर जरा सा भी संदेह हो तो तुरन्त उस सख्स को पता चले बिना पुलिस या महिला हेल्पलाइन पर इन्फार्म करें।

(महिला सुरक्षा से सम्बंधित हर हेल्पलाइन नंबर आप हमारी वेबसाइट से नोट कर सकते हैं। )


हम हर परिवार को यह सलाह देना चाहते हैं कि अपने घर की लडकियों को मजबूत बनाएं, उन्हें सावधान करें कि वो किसी पर भी आँख बन्द करके विश्वास न करें भले ही वह आपका विश्वसनीय पडोसी या रिश्तेदार हो। इस वक्त माहौल इतना खराब है कि जिसको मदद के लिए पुकारो वही फायदा उठा लेना चाहता है।

इसलिए आप सबसे गुजारिश है कि खुद को और अपनों को इतना सावधान रखिए कि घटनाएं कम से कम हों।

याद रखिये, वो घटनाएं जो थोडी सी सावधानी से टाली जा सकती थीं जब घटित होती हैं तो बडी तकलीफ होती है ।

सावधान रहिए, सुरक्षित रहिए।

बेटियां

हीरे हैं बेटे गर तो मोती हैं बेटियां

हर इक घर की लक्ष्मी होती हैं बेटियां


रिश्ते तोडना तो अक्सर आदत है बेटों की

हर रिश्ते को इक धागे में पिरोती हैं बेटियां


परिवार में सबकी फिकर रहती है इनको

सबको सुला के आखिर में सोती हैं बेटियां


इक ओर बडे होकर माँ बाप को रुलाते हैं बेटे

तो माँ बाप के लिए जीवन भर रोती हैं बेटियां





हीरे हैं बेटे गर तो मोती हैं बेटियां


हर इक घर की लक्ष्मी होती हैं बेटियां

महिला सुरक्षा से समझौता और नहीं

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